Bihar News: आधार बायोमेट्रिक अटेंडेंस पर पटना हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, निजता की दलील खारिज

Patna High Court Aadhaar biometric attendance right to privacy verdict
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पटना हाई कोर्ट ने आधार लिंक्ड फेस बायोमेट्रिक अटेंडेंस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की।

पटना हाई कोर्ट ने आधार लिंक्ड फेस बायोमेट्रिक अटेंडेंस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। कोर्ट ने कहा- निजता का अधिकार निरपेक्ष नहीं, स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार के लिए भर्ती जरूरी।

पटना हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत डॉक्टरों और शिक्षकों की आधार लिंक्ड फेस बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निजता का अधिकार महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन यह पूर्ण और असीमित अधिकार नहीं है, बल्कि सार्वजनिक हित और वैधानिक सीमाओं के अधीन है।

कोर्ट ने निजता के अधिकार पर क्या कहा?

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि केवल यह आशंका जताना कि फेस-आधारित आधार प्रमाणीकरण या जीपीएस लोकेशन से निजता प्रभावित हो सकती है, संवैधानिक उल्लंघन साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

कोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ताओं को यह दिखाना आवश्यक था कि उनके मौलिक अधिकारों का वास्तविक, प्रत्यक्ष और ठोस उल्लंघन हुआ है, जो इस मामले में प्रमाणित नहीं किया जा सका।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

हालांकि अदालत ने यह भी साफ किया कि केवल बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू कर देने से राज्य की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार नहीं आ सकता। कोर्ट ने कहा कि उपस्थिति सुनिश्चित करना एक सीमित समाधान है, जबकि समस्याएं कहीं अधिक गहरी हैं।

डॉक्टरों पर अत्यधिक कार्य दबाव पर चिंता

हाई कोर्ट ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यदि किसी डॉक्टर या मेडिकल शिक्षक को 24, 48 या 72 घंटे तक लगातार काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली किसी भी तरह से प्रभावी समाधान नहीं मानी जा सकती।

अदालत ने माना कि अत्यधिक दबाव और संसाधनों की कमी के कारण स्वास्थ्यकर्मी वैकल्पिक रास्ते तलाशने को मजबूर हो सकते हैं, जिससे पूरी व्यवस्था का उद्देश्य ही प्रभावित होता है।

खाली पदों को लेकर राज्य सरकार को चेतावनी

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक मेडिकल शिक्षण सेवा में हजारों खाली पदों को समयबद्ध तरीके से नहीं भरा जाता, तब तक राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार संभव नहीं है। अदालत ने संबंधित आयोग को निर्देश दिया कि वह राज्य सरकार को भर्ती और नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दे।

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