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पटना में नौकरी के नाम पर युवाओं से साइबर ठगी कराई जा रही थी। पुलिस ने फ्रॉड कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मास्टरमाइंड अब भी फरार है।

Patna Cyber Fraud: बिहार की राजधानी पटना में एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर देशभर के लोगों को ठग रहा था। इस गिरोह की खास बात यह थी कि बेरोजगार युवाओं को नौकरी का लालच देकर उन्हें इस अवैध धंधे में शामिल किया जाता था।

नौकरी का वादा, असल में ठगी का काम
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह के सरगना द्वारा युवाओं को 15 से 30 हजार रुपये तक की सैलरी का लालच दिया जाता था। उन्हें रहने और खाने की सुविधा भी फ्लैट में ही दी जाती थी। लेकिन नौकरी के नाम पर उनसे साइबर फ्रॉड करवाया जाता था।

सोसायटी के फ्लैट में चल रहा था ‘फ्रॉड कॉल सेंटर’
यह पूरा मामला शास्त्री नगर थाना क्षेत्र का है। एक सामान्य दिखने वाली सोसायटी के चौथे फ्लोर पर स्थित फ्लैट में इस गिरोह का संचालन हो रहा था। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता था, लेकिन अंदर लैपटॉप और मोबाइल के जरिए बड़े स्तर पर ठगी का नेटवर्क चलाया जा रहा था।

गुप्त सूचना पर पुलिस की छापेमारी
गुप्त सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शिवपुरी इलाके में कार्बन फैक्ट्री के पास स्थित एक बिल्डिंग के फ्लैट नंबर 404 में छापा मारा। इस दौरान मौके से पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि गिरोह का सरगना अंकित कुमार फरार होने में सफल रहा। उसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।

छापे में मिला भारी मात्रा में सामान
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने फ्लैट से 21 मोबाइल फोन, 24 सिम कार्ड, कई एटीएम कार्ड, चेक बुक, पासबुक और दो लैपटॉप बरामद किए। बरामदगी से स्पष्ट है कि यह गिरोह संगठित तरीके से बड़े पैमाने पर साइबर ठगी कर रहा था।

ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर ठगी
गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे सोशल मीडिया, कॉल और मैसेजिंग ऐप के जरिए लोगों को ऑनलाइन गेमिंग और जुए में कमाई का झांसा देते थे। इसके बाद उन्हें एक फर्जी प्लेटफॉर्म से जोड़कर धीरे-धीरे पैसे ठगे जाते थे। खास तौर पर दक्षिण भारत के लोगों को निशाना बनाया जाता था, ताकि भाषा और दूरी का फायदा उठाकर पहचान छिपाई जा सके।

कॉरपोरेट स्टाइल में चलता था गैंग
जांच में यह भी सामने आया कि इस गिरोह का संचालन किसी कंपनी की तरह होता था। हर सदस्य की अलग जिम्मेदारी तय थी—कोई कॉल करता था, कोई चैट के जरिए लोगों को फंसाता था, तो कोई बैंकिंग ट्रांजेक्शन संभालता था। सभी सदस्य अपनी पहचान छिपाने के लिए कोड नेम का इस्तेमाल करते थे।

पुलिस का बयान
इस मामले में सचिवालय एसडीपीओ-2 साकेत कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। फरार सरगना की तलाश जारी है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पुलिस अब बरामद मोबाइल, सिम कार्ड और लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच करा रही है, ताकि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पीड़ितों की पहचान की जा सके। आशंका है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों और बड़े साइबर अपराध नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं।

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