नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने का ऐलान कर बिहार की सक्रिय राजनीति से हटने का संकेत दे दिया है, जिससे 20 साल पुराने नेतृत्व का अंत हो रहा है।

पटना : बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव की पटकथा लिखी जा चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के जरिए घोषणा की कि वे अब राज्यसभा जा रहे हैं। उनके इस फैसले के साथ ही बिहार में करीब दो दशकों से चले आ रहे 'नीतीश युग' के समापन पर मुहर लग गई है। नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया है कि वे बिहार की नई बनने वाली सरकार को अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे।

​नीतीश का राज्यसभा जाना और उत्तराधिकार की जंग

​जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मुख्यमंत्री के बीच हुई महत्वपूर्ण चर्चा के बाद यह तय हुआ कि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करेंगे। उनके हटने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिहार की कमान किसके हाथों में होगी।

वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में जेडीयू और बीजेपी के बीच सत्ता हस्तांतरण के दो मुख्य फॉर्मूले चर्चा में हैं: या तो बीजेपी का मुख्यमंत्री और जेडीयू के दो डिप्टी सीएम होंगे, या जेडीयू का मुख्यमंत्री और बीजेपी के दो डिप्टी सीएम बनाए जाएंगे।

​सम्राट चौधरी: बीजेपी की ओर से सबसे मजबूत दावेदार

​मुख्यमंत्री की रेस में बीजेपी की तरफ से वर्तमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। बीजेपी नेतृत्व अब बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है और सम्राट चौधरी को आगे कर पार्टी 'लव-कुश' (कुर्मी-कोइरी) समीकरण को साधने की कोशिश में है। बीजेपी अब 26 साल पुरानी उस गलती को नहीं दोहराना चाहती जब उसने संख्या बल में ज्यादा होने के बावजूद नीतीश कुमार को नेतृत्व सौंपा था।

​विजय चौधरी: जेडीयू के भीतर नीतीश के 'हनुमान'

​अगर मुख्यमंत्री पद जेडीयू के पास ही रहता है, तो नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगी विजय चौधरी प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। विजय चौधरी को जेडीयू में नीतीश कुमार का 'नंबर 2' माना जाता है और वे सरकार की कोर कमेटी के अहम सदस्य हैं। अपनी मृदुभाषी शैली और प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाने वाले विजय चौधरी को नीतीश कुमार का 'हनुमान' भी कहा जाता है।

​निशांत कुमार की एंट्री और संघ का 'सरप्राइज' कार्ड

​इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक चौंकाने वाली अटकल यह भी है कि नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को राजनीति में सक्रिय कर उन्हें डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी सौंप सकते हैं। निशांत अभी तक राजनीति से दूर रहे हैं, लेकिन 2025 के विधानसभा चुनावों के दौरान वे सक्रिय देखे गए थे। वहीं, बीजेपी किसी 'संघ' समर्थित चेहरे जैसे विजय सिन्हा को लाकर भी चौंका सकती है, जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह का करीबी माना जाता है।

​बिहार विधानसभा 2025 के नतीजों का नया प्रभाव

​2025 के चुनाव परिणामों ने भी नए समीकरणों को जन्म दिया है, जहाँ एनडीए (NDA) गठबंधन ने भारी बहुमत हासिल किया है। बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि जेडीयू के खाते में 85 सीटें आई हैं। वहीं, महागठबंधन की ओर से आरजेडी को केवल 25 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। संख्या बल में बीजेपी के बड़े भाई की भूमिका में आने के कारण अब पार्टी बिहार में नेतृत्व परिवर्तन के लिए पूरी तरह दबाव बनाने की स्थिति में है।