हाजीपुर में डिलीवरी के बाद नवजात पर विवाद: 'बेटा' बताकर 'बेटी' देने का आरोप, डीएनए टेस्ट से खुलेगा राज

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बिहार के हाजीपुर सदर अस्पताल में डिलीवरी के बाद 'बेटा' बताकर 'बेटी' सौंपने का मामला सामने आया है।

बिहार के हाजीपुर सदर अस्पताल में डिलीवरी के बाद 'बेट' बताकर 'बेटी' सौंपने का मामला सामने आया है। अब, डीएनए टेस्ट से फैसला होगा। डीएम ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की।

Hajipur News: बिहार के हाजीपुर स्थित सदर अस्पताल में डिलीवरी के बाद बच्चे को लेकर हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया है। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के बाद उन्हें पहले पुत्र होने की जानकारी दी गई, लेकिन बाद में पुत्री सौंप दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है और पूरे घटनाक्रम की पड़ताल शुरू कर दी गई है।

तीन सदस्यीय टीम ने अस्पताल पहुंचकर की पूछताछ

जांच के लिए गठित समिति में एडीएम संजय सिंह, जिला आपदा अधिकारी रामपुकार राम और अपर जिला परिवहन पदाधिकारी रुचि कुमारी शामिल हैं। टीम गुरुवार शाम सदर अस्पताल पहुंची और डिलीवरी के समय मौजूद डॉक्टरों, नर्सों, ओटी स्टाफ और अन्य कर्मियों से विस्तार से पूछताछ की। साथ ही महिला के परिजनों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि वाकई बच्चा बदलने की घटना हुई या संचार में किसी प्रकार की चूक रही।

डीएनए टेस्ट से सच्चाई सामने आएगी

सिविल सर्जन श्यामनंद प्रसाद ने बताया कि मामले की पारदर्शी जांच के लिए नवजात और उसके परिजनों का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। उनके अनुसार, ऑपरेशन के दौरान मौजूद मेडिकल टीम से प्रारंभिक जानकारी ली गई है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष वैज्ञानिक जांच के बाद ही सामने आएगा।

हंगामे के बाद पुलिस पहुंची थी अस्पताल

घटना के बाद परिजनों ने सदर अस्पताल में हंगामा किया था, जिसके बाद नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराया। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है, लेकिन अधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

पति निजी अस्पताल में भर्ती, परिवार पर दोहरी मार

बताया गया है कि नवजात के पिता धीरज कुमार सड़क दुर्घटना के कारण पहले से ही एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनके पैर का ऑपरेशन हुआ है। परिवार का कहना है कि फिलहाल उन्हें इस विवाद की पूरी जानकारी नहीं दी गई है, क्योंकि वे खुद उपचाराधीन हैं। एक ओर प्रसूता अस्पताल में भर्ती है, वहीं दूसरी ओर पति इलाज करा रहे हैं, जिससे परिवार पर मानसिक दबाव और बढ़ गया है।

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