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नई दिल्ली। रणजी ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल में मुंबई और बड़ौदा की टक्कर हो रही। इस मुकाबले में मुंबई के पुछल्ले बल्लेबाज तनुष कोटियन और तुषार देशपांडे ने इतिहास रच दिया है। 10वें और 11वें नंबर पर बैटिंग के लिए उतरे इन दोनों बल्लेबाजों ने बड़ौदा के खिलाफ दूसरी पारी में शतक ठोकने का कारनामा किया है। इन दोनों के बीच आखिरी विकेट के लिए 232 रन की साझेदारी हुई। ये रणजी ट्रॉफी में अजय शर्मा और मनिंदर सिंह के बीच 10वें विकेट के लिए हुई 233 रन की पार्टनरशिप से एक रन कम है।
इसके साथ ही तुषार देशपांडे (123) और तनुष कोटियन (120*) प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 10वें और 11वें नंबर पर शतक जड़ने वाली दूसरी जोड़ी बन गए। मुंबई ने दूसरी पारी में 337 रन के स्कोर पर 9वां विकेट गंवाया था। लेकिन, इसके बाद तनुष और तुषार ने मिलकर टीम के स्कोर को 569 रन तक पहुंचा दिया। तनुष 120 रन बनाकर नाबाद लौटे जबकि तुषार ने 123 रन की पारी खेली। फर्स्ट क्लास क्रिकेट के इतिहास में ऐसा दूसरी बार ही हुआ है, जब एक पारी में 10वें और 11वें नंबर के बैटर ने सेंचुरी जमाई है।
इससे पहले, 1946 में भारत और इंग्लिश काउंटी टीम सरे के बीच हुए मुकाबले में चंदू सरवटे और शूते बनर्जी की जोड़ी ने ये कमाल किया था। इस पारी के दौरान तनुष कोटियन ने 115 गेंद में अपना शतक पूरा किया जबकि तुषार देशपांडे को अपना शतक पूरा करने के लिए 112 गेंद खेलनी पड़ी। वो मुंबई की तरफ से 11वें नंबर पर बैटिंग करते हुए शतक जमाने वाले पहले बैटर हैं।
जहां तक इस मुकाबले की बात है तो मुंबई ने पहली पारी में 384 रन बनाए थे। जवाब में बड़ौदा की पहली पारी 348 रन पर खत्म हुई थी। पहली पारी में मुंबई को 36 रन की बढ़त मिली थी और मुंबई ने अपनी दूसरी पारी में 569 रन बनाए। इस तरह बड़ौदा को जीत के लिए 606 रन का टारगेट मिला।
