Romi Bhinder fined: आईपीएल 2026 के बीच राजस्थान रॉयल्स के टीम मैनेजर रोमी भिंडर को मोबाइल फोन इस्तेमाल करने के मामले में राहत तो मिल गई, लेकिन उन्हें नियम तोड़ने के लिए जुर्माना भरना पड़ा। बीसीसीआई की एंटी-करप्शन एंड सिक्योरिटी यूनिट ने जांच के बाद भिंडर पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और चेतावनी भी दी।
यह मामला तब सामने आया था, जब रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच खेले गए मैच के दौरान भिंडर की एक तस्वीर वायरल हुई थी। इस तस्वीर में वे डगआउट में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते नजर आए थे। उनके पास ही 15 साल के युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी भी बैठे थे।
राजस्थान के मैनेजर के खिलाफ एक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए बीसीसीआई ने तुरंत एंटी करप्शन यूनिट को जांच के आदेश दिए। जांच में सामने आया कि भिंडर ने PMOA (प्लेयर मैच ऑफिशियल एरिया) के नियमों का उल्लंघन किया था। हालांकि, किसी तरह की मैच फिक्सिंग या भ्रष्टाचार से जुड़ी कोई बात सामने नहीं आई।
डगाआउट में कर रहे थे मोबाइल का इस्तेमाल
बीसीसीआई के एक सूत्र के मुताबिक, 'एंटी करप्शन यूनिट को जांच में कोई गंभीर गड़बड़ी नहीं मिली। यह सिर्फ PMOA नियमों का उल्लंघन था। भिंडर ने अपनी गलती मान ली और यह उनका पहला मामला था, इसलिए उन्हें 1 लाख रुपये का जुर्माना और चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।'
ACSU ने इस मामले में वैभव सूर्यवंशी से कोई पूछताछ नहीं की, क्योंकि मोबाइल फोन भिंडर का था और सूर्यवंशी सिर्फ उनके पास बैठे थे।
डगआउट में फोन के इस्तेमाल पर है पाबंदी
आईपीएल चेयरमैन अरुण धूमल ने पहले ही साफ कर दिया था कि डगआउट में मोबाइल फोन का इस्तेमाल सख्त मना है। उन्होंने कहा था कि मैनेजर के पास मोबाइल रखने की अनुमति होती है, लेकिन उसे डगआउट में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। केवल आपात स्थिति या मेडिकल इमरजेंसी में ही इसका उपयोग किया जा सकता है।
मैच से पहले जमा कराने होते हैं इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस
PMOA के नियमों के अनुसार, खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को अपने मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बंद करके टीम के सिक्योरिटी लायजन ऑफिसर के पास जमा कराने होते हैं। केवल कुछ सीमित स्टाफ को ही विशेष परिस्थितियों में अनुमति दी जाती है। ड्रेसिंग रूम में मोबाइल का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन वह भी कैमरों से दूर और सावधानी से। डगआउट में इसका इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है।
इस घटना ने राजस्थान रॉयल्स के लिए थोड़ी असहज स्थिति जरूर पैदा की, खासकर तब जब टीम का प्रदर्शन इस सीजन शानदार रहा है। टीम ने अब तक पांच में से चार मैच जीते हैं और सिर्फ एक मैच सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ हारा है।
कुल मिलाकर, यह मामला नियमों के उल्लंघन तक सीमित रहा और एंटी करप्शन यूनिट ने इसे गंभीर भ्रष्टाचार का मामला नहीं माना। हालांकि, बीसीसीआई ने साफ संकेत दिया है कि नियमों को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।