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SA Super Over Win vs AFG: टी20 क्रिकेट को फैंस एक्शन, रोमांच और थ्रिल की वजह से ही पसंद करते हैं और बात अगर अगर वर्ल्ड कप की हो और ऐसा कुछ फैंस को देखने को मिल जाए तो फिर ये सोने पर सुहागा जैसा है। बुधवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका और अफगानिस्तान के बीच ऐसा ही एक मुकाबला खेला गया, जो दर्शकों के लिए फुल पैसा वसूल रहा। पल-पल बदलती बाजी ने फैंस की सांसें थाम दी थीं। कभी लगता कि दक्षिण अफ्रीका बाजी मार जाएगा तो कभी अफगानिस्तान के पठानों ने ये बता दिया कि हम किसी से कम नहीं?  

आखिर में दो सुपर ओवर के बाद नतीजा निकला और अफगानिस्तान शायद दक्षिण अफ्रीका से नहीं, बल्कि किस्मत से हार गया। 

दूसरे सुपर ओवर में हारा अफगानिस्तान

पहले सुपर ओवर में जब नतीजा नहीं निकला तो बात दूसरे सुपर ओवर की आई। इस बार पहले बल्लेबाजी दक्षिण अफ्रीका ने की। डेविड मिलर और ट्रिस्टन स्टब्स ने तीन छक्के उड़ाए और ओवर में 23 रन आए। अब अफगानिस्तान को जीत के लिए 24 रन की दरकार थी। यहीं, कप्तान एडेन मार्करम ने सबसे बड़ा दांव खेला और गेंद हनुमान भक्त केशव महाराज को थमा दी। टी20 मुकाबले में आमतौर पर सुपर ओवर में स्पिन गेंदबाजों को कोई कप्तान गेंद थमाने का जोखिम नहीं लेता है। खासतौर पर तब, जब विपक्षी बल्लेबाज गेंद को हवाई सैर कराने की काबिलियत रखते हों। लेकिन, मार्करम ने केशव पर भरोसा जताया और तीन छक्के खाने के बाद भी वो जीत के हीरो बन गए। 

मार्करम ने हनुमान भक्त केशव पर जताया भरोसा

महाराज ने अपनी चतुराई और अनुभव का भरपूर इस्तेमाल किया। पहली दो गेंदों के भीतर ही मोहम्मद नबी को आउट कर अफगानिस्तान को बैकफुट पर धकेल दिया था। लेकिन, मैच अभी बाकी था। रहमानुल्लाह गुरबाज कुछ और ही इरादा करके आए थे। उन्होंने तीसरी, चौथी और पांचवीं गेंद पर तीन छक्के लगाकर पूरा पासा पलट दिया। अब अफगानिस्तान की जीत करीब लगने लगी थी। आखिरी गेंद पर अफगानिस्तान को 5 रन की जरूरत थी। एक बड़े हिट से काम बन सकता था लेकिन केशव ने अपना दिमाग बर्फ की तरह ठंडा रखा और गेंद सीधा जड़ में फेंकी। इसे हवा में उड़ाकर मारने के चक्कर में गुरबाज पॉइंट पर खड़े डेविड मिलर के हाथों कैच आउट हो गए और इस तरह महाराज अपने कप्तान के भरोसे पर खरे उतरे और हारी हुई बाजी को पलटते हुए टीम को रोमांचक जीत दिला दी। 

इस जीत के साथ मार्करम की सेना ने सुपर-6 की तरफ मजबूती से कदम बढ़ा दिए। अफगानिस्तान के लिए अब भले ही टूर्नामेंट में आगे बढ़ने की उम्मीदें करीब-करीब खत्म हो गईं हों लेकिन इस टीम ने ये साबित कर दिया कि अब टी20 फॉर्मेट में उनको कमतर आंकने की भूल किसी भी टीम को भारी पड़ सकती। अब वो अंडरडॉग नहीं, बल्कि अपने से मजबूत टीमों को पटखनी देने का दम रखते हैं।