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दबाव के चलते हार गये आनंद : मैग्नस कार्लसन

शतरंज में विश्वनाथन आनंद की बादशाहत खत्‍म हो गई है। दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन नए विश्व चैंपियन बन गए हैं।

दबाव के चलते हार गये आनंद :  मैग्नस कार्लसन
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चेन्नई. विश्व शतरंज चैंपियनशिप के खिताब के लिए चैलेंजर मैग्नस कार्लसन और गत चैंपियन विश्वनाथन आनंद के बीच शुक्रवार को खेली गई 10 बाजी ड्रॉ रही। इसके साथ ही मैग्नस कार्लसन विश्व शतरंज चैंपियनशिप विजेता बन गए। आपको बता दें कि मैग्नस कार्लसन सबसे कम उम्र में शतरंज के वर्ल्ड चैंपियन बनने का रिकॉर्ड भी बनाया।

मैग्नस कार्लसन और विश्वनाथन आनंद के बीच खेली गई 10 बाजी में से कार्लसन ने 6 के मुकाबले 3 अंकों के अंतर से आनंद को हराया। पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद का अपना खिताब बरकरार रखने का सपना चकनाचूर हो गया जबकि नॉर्वे के मैगनस कार्लसन विश्व चैंपियनशिप में दसवीं बाजी ड्रॉ कराकर शतरंज के नये बादशाह बन गये। कार्लसन, जो कि 30 नवंबर को अपना 23वां जन्मदिन मनाएंगे,वर्तमान समय में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी कार्लसन ने कहा कि उन्हें खुशी है कि वह 1975 के बाद पश्चिमी देशों के पहले चैंपियन हैं।

उन्होंने कहा,‘मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं. यहां और लंदन (जहां कार्लसन ने कंडिडेट्स में जीत दर्ज करके लिये यहां के लिये क्वालीफाई किया था) दोनों जगह मुकाबला कड़ा था। भारत में मेरा बहुत अच्छा स्वागत किया गया।’उन्होंने दस बाजियों में से तीन में जीत दर्ज की जबकि बाकी सात बाजियां ड्रॉ रही। इस तरह से कार्लसन 6.5 अंक हासिल करके दसवीं बाजी के बाद ही विश्व चैंपियन बन गये।

कार्लसन ने आखिरी बाजी के बारे में भी बात की जिसमें उन्होंने ड्रा कराने से पहले आनंद को काफी परेशानी में रखा। उन्होंने कहा कि चैंपियनशिप का अंत अच्छा हुआ। कार्लसन को खिताब के लिये केवल ड्रॉ की दरकार थी लेकिन उन्होंने नीरस खेल दिखाने के बजाय आनंद को पूरी चुनौती दी, जिससे दसवीं बाजी काफी कड़ी बन गयी थी। आलम यह रहा कि नॉर्वे के खिलाड़ी ने आनंद को चार घंटे और 45 मिनट तक जूझने के लिये मजबूर किया। विश्व चैंपियनशिप के इतिहास में यह सबसे एकतरफा मुकाबला रहा। आनंद ने पांच बार 2000, 2007, 2008, 2010 और 2012 में खिताब जीता था, लेकिन विडम्बना देखिये कि उन्हें अपने घरेलू शहर चेन्नै में अपना ताज गंवाना पड़ा। यह पहला अवसर है जबकि आनंद विश्व चैंपियनशिप मुकाबले में एक भी बाजी जीतने में नाकाम रहे।

कार्लसन ने आधा अंक दसवीं बाजी में हासिल कर लिए। आनंद को पहली नौ बाजियों में तीन बार हार झेलने के बाद मुकाबले में बने रहने के लिए आखिरी तीन बाजियां जीतने की जरूरत थी, लेकिन कार्लसन ने भारतीय सुपर ग्रैंडमास्टर को दसवीं बाजी में ड्रा पर रोककर मामला निपटा दिया।

नार्वे के 22 साल के कार्लसन इस जीत के साथ ही विश्व शतरंज खिताब जीतने वाले विश्व के सबसे युवा खिलाडी बन गए हैं। सबसे कम उम्र में विश्व खिताब जीतने का रिकार्ड रूस के गैरी कास्परोव के नाम है। कार्लसन को इस जीत से नौ करोड़ 60 लाख रुपए की भारी भरकम पुरस्कार राशि मिली जबकि आनंद को छह करोड़ 40 लाख रुपए से संतोष करना पड़ा।

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