Vikat Sankashti Chaturthi: 5 अप्रैल 2026, रविवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। इस दिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि दोपहर लगभग 12 बजे तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्थी तिथि आरंभ हो जाएगी। इसी चतुर्थी तिथि पर विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाएगा, जो भगवान गणेश की आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, हर माह की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है, जबकि वैशाख माह की इस चतुर्थी को विशेष रूप से विकट संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
तिथि और योग का संयोग
पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि 5 अप्रैल को दोपहर तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी और 6 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। इस दिन दोपहर 2 बजकर 44 मिनट तक वज्र योग रहेगा, जिसे सावधानी से कार्य करने का समय माना जाता है। वहीं, विशाखा नक्षत्र रात 12 बजकर 8 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
शुभ मुहूर्त
इस दिन पूजा-पाठ के लिए कई शुभ समय उपलब्ध रहेंगे। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:56 से 5:43 तक रहेगा, जो ध्यान और पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:16 से 1:06 तक रहेगा, जिसमें शुभ कार्य करना लाभकारी माना जाता है।
विकट संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
इस पावन दिन की शुरुआत प्रातःकाल स्नान और शुद्धता के साथ करनी चाहिए। व्रत का संकल्प लेने के बाद पूजा स्थान को साफ करके एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद गंगाजल या स्वच्छ जल से भगवान का अभिषेक करें और सिंदूर व अक्षत अर्पित करें।
पूजन के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करते हुए 21 दूर्वा अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है। इसके पश्चात भगवान को फूल, माला और मोदक या अन्य प्रिय भोग अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर धूप-दीप से आरती करें और व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।
चंद्र दर्शन का महत्व
संकष्टी चतुर्थी व्रत में चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोला जाता है। इस दौरान दूध मिश्रित जल से अर्घ्य देकर गणेश जी से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
5 अप्रैल 2026 का दिन आस्था, संयम और श्रद्धा का प्रतीक है। विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है। सही विधि और शुभ मुहूर्त में की गई पूजा जीवन में शुभ परिणाम ला सकती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।