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अलविदा 2018 / इस साल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा सरदार पटेल का स्टैच्यू

दिसबंर का महीना चल रहा है और अगला महीना यानि जनवरी नया साल 2019 आने वाला है। बीते साल 2018 में देश ने कई इतिहास रचे उसमें से एक है देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर लंबी प्रतिमा ''स्टैच्यू ऑफ यूनिटी''।

अलविदा 2018 / इस साल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा सरदार पटेल का स्टैच्यू
दिसबंर का महीना चल रहा है और अगला महीना यानि जनवरी नया साल 2019 (Happy New Year 2019) आने वाला है। बीते साल 2018 (Year 2018) में देश ने कई इतिहास रचे उसमें से एक है देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ( Sardar vallabhbhai Patel) की 182 मीटर लंबी प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' (Statue of Unity)। जो इस साल काफी चर्चा में रहा। देश ही नहीं दुनियाभर में इस स्टैच्यू की काफी चर्चाएं हुई।
बीती 31 अक्टूबर के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्मदिन जिसे हम 'राष्ट्रीय एकता दिवस' (Nation Unity Day) के रूप में मनाते हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने 143वीं जयंती पर सरदार वल्लभभाई पटेल की की 182 मीटर ऊंची मूर्ति का अनावरण कर दूरिज्म को बढ़ावा दिया।

कहां है सरकार पटेल का स्टैच्यू

देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का स्टैच्यू गुजरात में नर्मदा के किनारे बना। दुनिया का सबसे ऊंचा स्टैच्यू है। सरदार सरोवर नर्मदा बांध, हाइवे और हजारों किमी नर्मदा नहर बनाने वाले राठौड़ की देखरेख में स्टैच्यू 44 महीने में बन कर तैयार हुआ है। सबसे ऊंचे स्टैच्यू का रिकार्ड अब से पहले अमेरिका और चीन का था।

दुनिया का सबसे बड़ा स्टैच्यू

भारत के गुजरात में बना 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' दुनिया का सबसे ऊंचा स्टैच्यू है। ये दुनिया के सबसे बड़े स्टैच्यू यानि 'चीन की स्प्रिंग टेंपल बुद्ध' (128 मीटर)से भी ऊंचा है। अगर अमेरिका के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (93 मीटर) की बात करें तो पटेल का स्टैच्यू उससे भी दोगुना है। वहीं दूसरी तरफ मुंबई के अरब सागर में 190 मीटर का शिवाजी का स्टैच्यू भी बन रहा है जो पटेल के बाद पहले नंबर पर आ जाएगा। शिवाजी की प्रतिमा पर करीब 7086 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। जो कि 2021 तक बन कर तैयार हो जाएगी।

पीएम मोदी का सपना

इस स्टैच्यू को बनाने का सपना देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में देखा था। उसी साल इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। इस स्टैच्यू को बनाने के लिए पीएम ने कहा था कि ये स्टैच्यू सैलानियों के लिए भारत में मुख्य केंद्र होगा और इससे टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा पीएम मोदी ने कहा था कि हर भारतीय को इस बात का दुख है कि सरदार पटेल भारत के पहले प्रधानमंत्री नहीं बने।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की खासियत (Statue of Unity)

देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की मूर्ति टूरिस्टों के लिए इस वक्त मुख्य केंद्र बनी हुई है। सरदार वल्लभ पटेल की 182 मीटर ऊंची मूर्ति को बनाने में करीब 44 महीन का समय लगा था। स्टैच्यू को बनाने में 800 स्थानीय और 200 चीन कारीगरों की मदद ली गई थी। अक्टूबर 2014 मेंलार्सन एंड टूब्रो कंपनी इस स्टैच्यू बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। मूर्ति बनाने में करीब 3000 करोड़ रुपये आया था। 4076 मजदूरों ने दो शिफ्टों में काम किया। वहीं दूसरी तरफ 600 करोड़ रुपये 15 साल तक इस स्टैच्यू की मेंटिनेंस के लिए दिए गए हैं। ये मूर्ति सरदार सरोवर नर्मदा बांध पर बनी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है।

स्टैच्यू के बारे में कुछ मुख्य बातें...

1. इस स्टैच्यू की ऊंचाई 182 मीटर रखी गई है जो कि गुजरात विधानसभा की सीटों के बराबर है।
2. पटेल की मूर्ति बनाने में 18 हजार 500 टन स्टील नींव में और 6 हजार 500 टन स्टील मूर्ति में लगाया गया है।
3. इस स्टैच्यू को बनाने में 989 करोड़ रुपये की लागत आई थी। इसके रखरखाव के लिए भी करोड़ों रुपया दिए गए हैं।
4. इस मूर्ति के अंदर एक लिफ्ट लगाई गई है जो कि पटेल के दिल तक पहुंचती है। टूरिस्ट यहां आकर भी सैर कर सकते हैं। इसके लिए टिकट भी रखी गई है।
5. इस मूर्ति को बनाने में चीन की एक कंपनी अहम भूमिका निभाई है।
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