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अटल से लेकर पीएम मोदी तक रहे करीबी रिश्ते, जानें कैसा रहा अनंत कुमार का राजनीतिक सफर

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार का बीते सोमवार को बेंगलुरू के एक निजी अस्पताल में काफी समय से फेफड़े के कैंसर की बीमारी से निधन हो गया। आज बेंगलुरु उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा।

अटल से लेकर पीएम मोदी तक रहे करीबी रिश्ते, जानें कैसा रहा अनंत कुमार का राजनीतिक सफर

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार का बीते सोमवार को बेंगलुरू के एक निजी अस्पताल में काफी समय से फेफड़े के कैंसर की बीमारी से निधन हो गया। आज बेंगलुरु उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा।

अनंत कुमार की गिनती कर्नाटक ही नहीं केंद्र की राजनीति में भी अहम योगदान रहा। बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शामिल अनंत कुमार की हैसियत सबसे ऊपर थी। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार में भी उनकी अहम हैसियत थी।

राजनीति में करियर की शुरुआत

अनंत कुमार ने अपनी राजनीति की शुरूआत आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र समूह के सदस्य बनकर कीं। 1985 में उन्हें एबीवीपी का राष्ट्रीय सचिव भी बनाया गया एंव 1996 में वे भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के राज्य अध्यक्ष तथा बाद में राष्ट्रीय सचिव बनाया गया एंव इसके साथ ही वह 11वीं लोक सभा के लिए बेंगलुरू दक्षिण लोकसभा क्षेत्र से चुने गये।
पहली बार वह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वह केंद्रीय उड्डयन मंत्री बनें, फिर वह 1999 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार में भी केबिनेट मंत्री रहें। फिल 2003 में बीजेपी की कर्नाटक राज्य इकाई के अध्यक्ष बनकर 2004 में कर्नाटक लोकसभा में सबसे अधिक सीटें हासिल कर पार्टी को बहुमत जीत दिलाई।
इसके साथ ही भाजपा के महासचिव पद पर रहकर एमपी, बिहार, छत्तीसगढ़ एंव अन्य राज्यों में पार्टी का नेतृत्व किया। 26 मई 2014 को अनंत कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में कैबिनेट में रसायन और उर्वरक मंत्री के अलावा संसदीय कार्य मंत्री का भी पद मिला। बता दें कि वाजपेयी सरकार में उन्‍होंने पर्यटन, खेल, युवा मामलों, संस्‍कृति, शहरी विकास और गरीबी उन्‍मूलन जैसे मंत्रालयों का प्रभार भी संभाला था।

लंदन और अमेरिका में चला ईलाज

बता दें कि अनंत कुमार का निधन कैंसर जैसी बीमारी से हुआ 59 साल के अनंत का पहले लंदन और फिर न्यूयॉर्क में इलाज चला और 20 अक्टूबर को ही उन्हें बेंगलुरू लाकर एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती किया गया। जिसके बाद 12 नवंबर को उनका निधन हो गया।
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