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PHD में नकल रोकने अब UGC ने मांगी छात्रों से राय

पीएचडी के लिए तैयार हो रहा नया मसौदा।

PHD में नकल रोकने अब UGC ने मांगी छात्रों से राय
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शोध कार्य में छात्रों के नकल से परेशान यूजीसी ने अब छात्रों से ही मदद मांगी है। पीएचडी में नकल रोकने के लिए यूजीसी ने नया प्रारूप तैयार किया है। इस नए प्रारूप पर छात्रों से 30 सितंबर तक विचार मांगे गए हैं।

छात्रों के अतिरिक्त शिक्षाविद और प्राध्यापक भी इसमें सुझाव दे सकते हैं। इस प्रारूप में विद्यार्थियों को दंड का प्रावधान है। यूजीसी का मानना है कि शोध कार्यों में मौलिकता घट रही है और नकल की प्रवृत्ति बढ़ी है, इसलिए इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।

नकल रोकने नए नियम कमेटी के अध्ययन रिपोर्ट के बाद तैयार किए गए हैं। यूजीसी ने कुछ दिनों पूर्व पीएचडी में नकल रोकने एक कमेटी गठित की थी। विभिन्न मामलों और यूजीसी को आ रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए ये सिफारिशें तैयार की गई हैं।

इसमें अगर किसी विद्यार्थी की थीसिस किसी पूर्व शोध किए विद्यार्थियों से मिलती है, तो उसकी जांच कर विद्यार्थियों को फिर से लिखने का निर्देश यूजीसी द्वारा दिया जाएगा। नकल के भी कई स्तर बनाए गए हैं।

रद्द होगा रजिस्ट्रेशन

नए नियमों में छात्रों का विभिन्न स्तर तैयार किया जाएगा। पहले स्तर पर उन छात्रों को रखा जाएगा, जिनकी थीसिस पूर्व शोधों से 10 से 40 फीसदी मिलती है। इन्हें नकल किए गए भाग को निकालकर मूल प्रति जमा करने के लिए छह महीने का समय दिया जाएगा।

दूसरे स्तर में 40 से 60 फीसदी और तीसरे स्तर में 60 फीसदी से अधिक नकल करने वाले विद्यार्थियों को रखा जाएगा। दूसरे स्तर के विद्यार्थी को सुधारित प्रति जमा करने के लिए अधिकतम 18 महीने का समय दिया जाएगा, लेकिन जो विद्यार्थी अपनी थीसिस में 60 फीसदी से अधिक नकल किए पाए जाएंगे, उनका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा।

एमओओसी के लिए मांगे आवेदन

इसके अलावा यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) ने मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स चलाने में दिलचस्पी रखने वाले संस्थानों और अकादमिशियनों से आवेदन मांगा है। ये कोर्स आईटी प्लेटफॉर्म 'स्वयं' चैनल द्वारा छात्रों को ऑफर किए जाएंगे। इसके लिए वहीं संस्थान आवेदन दे सकते हैं, जो पहले से तय आहर्ताओं को पूरा करें।

संस्थान के पास संबंधित विषय में पोस्टग्रेजुएट स्तर का 10 साल का शिक्षण अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा संस्थान द्वारा एमओओसी विकसित करने के लिए एक स्वीकृति पत्र भी देना अनिवार्य है। सर्कुलर के अनुसार कोर्स को-ऑडिनेटर एक समय में सिर्फ एक ही कोर्स ऑफर कर सकता है।

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