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Reservation in India सवर्ण आरक्षण से जुड़े ये हैं 5 अनसुलझे सवाल, एक बार जरूर पढें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का सबसे महत्वपूर्ण सवर्ण आरक्षण बिल लोकसभा में पास हो गया है। नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

Reservation in India  सवर्ण आरक्षण से जुड़े ये हैं 5 अनसुलझे सवाल, एक बार जरूर पढें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की सरकार का सबसे महत्वपूर्ण सवर्ण आरक्षण बिल (Upper Caste Bill) लोकसभा (Lok Sabha) में पास हो गया है। नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए अब राज्यसभा (Rajya Sabha) में पेश किया जाएगा।
बता दें कि सवर्ण (जनरल कोटा) समाज उसे कहते हैं तो सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध समाज को कहा जाता है। लेकिन मोदी सरकार जिन लोगों को आरक्षण देने जा रही है वो आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को देने की बात कही है।
जहां सरकार सवर्णों को 10 फीसदी का आरक्षण देने के बारे में सोच रही है। वहीं इस वक्त एससी के लिए 15, एसटी के लिए 7.5 और ओबीसी के लिए 27 फीसदी आरक्षण दिया हुआ है।
संविधान के मुताबिक, किसी भी समाज के लोगों को सरकारी नौकरी और पढ़ाई में 50 फीसदी से ज्यादा तक का आरक्षण नहीं दे सकते हैं। लेकिन इस वक्त सवर्ण की संख्या 15 फीसदी है और सरकार इन्हें 10 फीसदी तक का आरक्षण देने की बात कह रही है। ऐसे में कई सवाल उठते हैं।

ये हैं वो अनसुलझे पांच सवाल

पहला सवाल - सवर्ण समाज को आरक्षण देने का ऐलान लोकसभा चुनाव से तीन महीने पहले क्यों किया गया?
दूसरी सवाल - क्या मोदी वर्तमान कार्यकाल में इस फैसले पर अमल कर पाएगी?
तीसरा सवाल - मोदी सरकार की इस नीति के दीर्घकालिक परिणाम क्या होंगे?
चौथा सवाल - क्या मुसलमानों और ईसाइयों को इस फैसले का लाभ मिलेगा?
पांचवा सवाल - क्या आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाना कानून संगत है?
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