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RBI की नीतिगत समीक्षा मंगलवार को, CRR में हो सकती है कटौती

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा

RBI की नीतिगत समीक्षा मंगलवार को, CRR में हो सकती है कटौती
नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक की मंगलवार आने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले फिक्की के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती से विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने में मदद नहीं मिली है। सर्वेक्षण में शामिल 69 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि रेपो दर में (जिस दर पर रिजर्व बैंक बैंकों को अल्पकालिक उधार देता है) कमी के वाबजूद वे अपने यहां किसी बड़े निवेश की संभावना नहीं देख रही हैं।
सर्वे में शामिल कुछ लोगों ने कहा कि कैश रिजर्व रेशियो में आरबीआई कमी कर सकता है। पॉलिसी स्टेटमेंट में आरबीआई यह चेतावनी दे सकता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दर बढ़ाने की दिशा में उठने वाला कदम और उसकी टाइमिंग अहम होगी।
राजन यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि तीन महीने से भी कम वक्त में उन्होंने दो बार जो रेट कट किए हैं, उसका फायदा बैंक आगे बढ़ाएं। राजन बेमौसम बारिश और दुनिया के कुछ हिस्सों में बढ़ते सियासी तनाव के चलते महंगाई पर पड़ने वाले असर का आकलन भी करना चाहते हैं। हालांकि ईरान से जुड़ी न्यूक्लियर डील को राहत भरी घटना माना जा रहा है।
पोल में शामिल सभी 11 इंस्टीट्यूट्स ने रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश से इनकार किया। रेपो रेट फिलहाल 7.50% है। यह बेंचमार्क रेट है, जिस पर बैंक आरबीआई से शॉर्ट टर्म फंड उधार लेते हैं। पोल में जवाब देने वालों में से 30-40% का कहना था कि सीआरआर में कटौती हो सकती है। सीआरआर डिपॉजिट का वह हिस्सा होता है, जिसे बैंकों को आरबीआई के पास अनिवार्य रूप से रखना होता है और उस पर बैंकों को इंटरेस्ट इनकम नहीं होती है। सीआरआर अभी 4% पर है। एक्सिस बैंक के चीफ इकनॉमिस्ट सौगत भट्टाचार्य ने कहा, 'आरबीआई को कठिन संतुलन साधना है।'
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, रिलायंस म्यूचुअल फंड में फिक्स्ड इनकम हेड अमित त्रिपाठी ने क्या कहा -
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