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जानिए कौन हैं जिग्नेश मेवाणी, इस विवादित बयान से बने दलितों के मसीहा

जिगनेश मेवाणी दलितो के हित की लड़ाई लड़ रहे है, अब बीएसपी में मायावती के बाद दूसरा चेहरा बनकर उभर रहे है गुजरात के जिगनेश मेवाणी।

जानिए कौन हैं जिग्नेश मेवाणी, इस विवादित बयान से बने दलितों के मसीहा

दलितो का प्रतिनिधित्व करने की बात करें तो हमारा सीधा ध्यान बसपा की प्रमुख मायावती पर आता है। जो इन दलितों की मेन लीडर बनकर सामने आई और इतना ही नहीं एक मजबूत नेता के रूप में बनकर उभरी। लेकिन अब मायावती के बाद दूसरा फेस गुजरात से दलित आंदोलन में जिग्नेश मेवाणी का देखने को मिल रहा हैं।

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अहमबाद से है नाता

11 दिसंबर 1980 में गुजरात के मेहसाना में जन्मे मेवाणी इन दिनों मेघानीनगर में रह रहे हैं। यह अहमदाबाद का दलित बहुल इलाक़ा है। उनके पिता नगर निगम के कर्मचारी थे और अब रिटायर हो चुके हैं। महात्मा गांधी की 'दांडी यात्रा' से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने दलितों की यात्रा का आयोजन किया और उसे नाम दिया दलित अस्मिता यात्रा।

इन आन्दोलनों में जुड़े जिग्नेश

ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट मुकुल सिन्हा के 'जन संघर्ष मंच' को भी जिग्‍नेश ने ज्वाइन किया था। इसके साथ ही मेहसाणा जिले में जन्मे जिग्नेश 'आजादी कूच आंदोलन' चला चुके हैं। जिसमें 20 दलितों के साथ मिलरकर मरे जानवरों को ना उठाने और मैला ना ढोने की शपत दिलाई थीदौरान उन्होंने दंगा पीड़ितों और वर्कर यूनियन के लिए लड़ाई लड़ी। बाद में आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता बने।
राज्य में दलितों का वोट प्रतिशत करीब सात फीसदी है। जिग्नेश दलित आंदोलन के दौरान एक काफी पॉपुलर नारा दिया था। 'गाय की पूंछ तुम रखो हमें हमारी जमीन दो'

इतनी भाषाओं का है ज्ञान

34 साल के जिग्नेश मवाणी अंग्रेज़ी, गुजराती और हिंदी तीनों भाषाओं में बात करने के साथ ही उनकी भाषाओं में बहुत अच्छी पकड़ है। जिग्‍नेश ने मॉस कम्युनिकेशन और कानून की पढ़ाई की है।
वे पत्रकार भी रह चुके हैं, उन्‍होंने मुंबई के एक अखबार में नौकरी भी की है। पेशे से वकील जिग्‍नेश साहित्य में भी विशेष रुचि रखते हैं। उन्होंने दिल्ली में जेएनयू के छात्रों के संघर्ष में भी शिरकत की है।
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