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ओपी राजभर बीजेपी से मुकाबले के लिए आप, टीएमसी और शिवसेना के साथ कर रहे बातचीत, जानें क्या है पूरा प्लान

ओपी राजभार ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि कल मैं आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह से मिला था।

ओपी राजभर बीजेपी से मुकाबले के लिए आप, टीएमसी और शिवसेना के साथ कर रहे बातचीत, जानें क्या है पूरा प्लान
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सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने रविवार को कहा कि वे टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, आप नेता अरविंद केजरीवाल और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को एक साथ एक मंच पर लाने और भाजपा का मुकाबला करने के लिए एक प्रभावी मोर्चा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

बता दें कि एसबीएसपी ने साल 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ गठबंधन में लड़ा था। लेकिन बाद में अलग हो गया। उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओपी राजभार ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि कल मैं आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह से मिला था। उनका दृष्टिकोण पॉजिटिव था। उन्होंने भागीदारी संकल्प मोर्चा का हिस्सा बनने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

मोर्चा में शामिल होने को लेकर अंतिम फैसला दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल करेंगे। इस संबंध में अगले हफ्ते दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के साथ बैठक होगी। पत्रकारों ने जब ओपी राजभर से पूछा कि क्या असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम की मौजूदगी के बावजूद केजरीवाल मोर्चा में शामिल होने को तैयार हैं? इस पर उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को रोकना समय की मांग है।

यदि भाजपा महबूबा मुफ्ती से हाथ मिला सकती है तो केजरीवाल और ओवैसी भी बीजेपी को रोकने के लिए एक ही मंच पर आ सकते हैं। राजभर ने कहा कि उनकी कोशिश टीएमसी प्रमुख बनर्जी और शिवसेना अध्यक्ष ठाकरे को एक मंच पर लाने और भाजपा का मुकाबला करने के लिए एक प्रभावी मोर्चा बनाने की होगी। एसबीएसपी प्रमुख ने कहा कि वह पहले ही शिवसेना नेता संजय राउत और तृणमूल कांग्रेस के महासचिव के साथ बातचीत कर चुके हैं।

संजय राउत के जल्द ही लखनऊ आने की संभावना है और इस संबंध में उनके साथ निर्णायक बातचीत की जाएगी। जानकारी के लिए आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में साल 2017 के विधानसभा चुनावों में एसबीएसपी ने आठ सीटों पर चुनाव लड़ा और चार पर जीत हासिल की थी। जिसके बाद राजभर को कैबिनेट मंत्री बनाया गया लेकिन बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

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