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केंद्र में खेमका की प्रतिनियुक्ति पर विचार के बारे में खुलासा करने के आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई रोक

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीआईसी के एक निर्देश पर रोक लगा दी है जिसके तहत डीओपीटी को बताने को कहा गया था कि क्या आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर विचार हुआ था।

केंद्र में खेमका की प्रतिनियुक्ति पर विचार के बारे में खुलासा करने के आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई रोक
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीआईसी के एक निर्देश पर रोक लगा दी है जिसके तहत डीओपीटी को बताने को कहा गया था कि क्या आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर विचार हुआ था।

खेमका ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के गुड़गांव में कथित अवैध भूमि सौदे को रद्द कर दिया था। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की एक याचिका पर न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति चंद्र शेखर की पीठ ने यह आदेश दिया।
विभाग ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के 18 जनवरी 2017 के फैसले को चुनौती दी थी। सीआईसी ने अपने आदेश में डीओपीटी को खुलासा करने को कहा था कि क्या हरियाणा कैडर के 1991 बैच के आईएएस अधिकारी का नाम 2014 के केंद्रीय स्टाफिंग योजना के तहत भारत सरकार में संयुक्त सचिव के रूप में प्रतिनियुक्ति के लिए सिविल सर्विसेज बोर्ड के समक्ष रखा गया। सीआईसी के फैसले को पिछले साल 25 अगस्त को उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने बरकरार रखा था।
दलीलें सुनने के बाद पीठ ने 18 जनवरी 2017 के आदेश के क्रियान्वयन पर सुनवाई की अगली तारीख 14 नवंबर तक रोक लगा दी । अदालत ने खेमका को नोटिस जारी कर सुनवाई की अगली तारीख के पहले डीओपीटी की अपील पर अपना पक्ष भी स्पष्ट करने को कहा।
डीओपीटी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि खेमका ने जो जानकारी मांगी है वह सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे से बाहर है।

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