बजट 2026 | उम्मीदें: नौकरीपेशा से लेकर अन्नदाता तक, जानिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से किस वर्ग की क्या हैं 15 बड़ी मांगें

बजट 2026-27 से क्या मिलेगा आम आदमी को? इनकम टैक्स, रेलवे, किसान, हेल्थ-एजुकेशन पर 15 बड़ी उम्मीदें
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जाने वाला आगामी बजट 2026-27 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। सरकार का लक्ष्य वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखते हुए उपभोग और निवेश के बीच संतुलन बनाना है। इस बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने, मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ाने और बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कड़े और सुधारात्मक फैसलों की उम्मीद है।
1. आयकर सीमा में विस्तार: 13 लाख तक की आय को टैक्स मुक्त करने का प्रस्ताव
मध्यम वर्ग की सबसे प्रमुख मांग व्यक्तिगत आयकर के स्लैब में बदलाव है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई कर व्यवस्था को अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर 13 लाख रुपये तक कर सकती है।
वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में मुद्रास्फीति के प्रभाव को कम करने के लिए यह कदम अनिवार्य माना जा रहा है। यदि ऐसा होता है, तो मध्यम आय वर्ग के परिवारों के पास निवेश और घरेलू उपभोग के लिए अधिक अधिशेष धन उपलब्ध होगा, जो अंततः बाजार में मांग को बढ़ाएगा।
2. रेलवे में वरिष्ठ नागरिकों की रियायत: 50% तक छूट की बहाली की संभावना
संसदीय समितियों और नागरिक समूहों के लगातार दबाव के बाद, रेलवे बजट में वरिष्ठ नागरिकों के लिए 'रेल सफर रियायत' को दोबारा लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
प्रस्ताव के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों को 40% और 58 वर्ष से अधिक की महिलाओं को 50% की छूट मिल सकती है। यह न केवल बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि भारतीय रेलवे की छवि को एक जन-कल्याणकारी संस्था के रूप में पुनः सुदृढ़ करेगा।
3. रेल नेटवर्क का आधुनिकीकरण: 300 नई ट्रेनों और अमृत भारत स्टेशनों का विस्तार
भारतीय रेलवे के कायाकल्प के लिए सरकार 'अमृत भारत स्टेशन योजना' और नई ट्रेनों के संचालन पर रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय कर सकती है। बजट 2026 में 300 नई ट्रेनों की घोषणा होने की संभावना है, जिसमें वंदे भारत स्लीपर और हाई-स्पीड अमृत भारत ट्रेनों की संख्या सर्वाधिक होगी।
इसके अलावा, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के पूर्ण संचालन और सुरक्षा के लिए 'कवच' प्रणाली को पूरे देश में लागू करने के लिए बड़े फंड का आवंटन किया जा सकता है।
4. स्वास्थ्य बजट में वृद्धि: जीडीपी के 2.5% तक पहुंचने का लक्ष्य
भारत के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए विशेषज्ञों ने बजट आवंटन को स्वास्थ्य क्षेत्र की कुल जीडीपी के 2.5% तक ले जाने का सुझाव दिया है।
इस बजट में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) के आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (NDHM) के विस्तार के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं। संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों के प्रबंधन के लिए नई शोध इकाइयों की स्थापना और दवाओं के स्थानीय निर्माण के लिए PLI स्कीम को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
5. चिकित्सा शिक्षा में गुणवत्ता: हर जिले में मेडिकल कॉलेज और पीजी सीटों में वृद्धि
'क्वालिटी मेडिकल एजुकेशन' को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रत्येक जिले में एक सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के अपने संकल्प को और गति देगी। बजट में न केवल स्नातक (MBBS) बल्कि स्नातकोत्तर (PG) सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष अनुदान दिया जा सकता है।
इससे देश में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी दूर होगी और छात्रों को विदेशों में पढ़ने जाने के बजाय देश में ही किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सकेगी।
6. धारा 80C के तहत निवेश सीमा: 1.5 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख करने की मांग
आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत निवेश की सीमा पिछले एक दशक से स्थिर है। आर्थिक विश्लेषकों का तर्क है कि दीर्घकालिक बचत को प्रोत्साहित करने के लिए इस सीमा को बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये किया जाना चाहिए।
इससे नागरिकों को पीपीएफ, ईएलएसएस और जीवन बीमा जैसी योजनाओं में अधिक निवेश करने का अवसर मिलेगा, जिससे सरकार को दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए सस्ती पूंजी प्राप्त होगी।
7. वेतनभोगियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन: 75,000 से 1 लाख तक की राहत संभव
नौकरीपेशा वर्ग के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन एक महत्वपूर्ण राहत है। वर्तमान में यह 50,000 रुपये है, जिसे बढ़ाकर 75,000 या 1,00,000 रुपये करने की प्रबल संभावना है। महंगाई के कारण बढ़ते जीवन-यापन के खर्चों को देखते हुए यह एक न्यायोचित कदम होगा। यह बदलाव सीधे तौर पर देश के करोड़ों वेतनभोगी कर्मचारियों की शुद्ध आय में वृद्धि करेगा।
8. स्वास्थ्य बीमा पर GST की समीक्षा: 18% से घटाकर 5% करने का दबाव
स्वास्थ्य सेवाओं को किफायती बनाने के लिए बीमा प्रीमियम पर लगने वाले 18% GST को कम करने की मांग की जा रही है। वित्त मंत्रालय इस पर विचार कर सकता है कि क्या इसे 5% स्लैब में लाया जा सकता है या वरिष्ठ नागरिकों के लिए इसे पूरी तरह शून्य किया जा सकता है। यह कदम देश में स्वास्थ्य बीमा की पैठ बढ़ाने में गेम-चेंजर साबित होगा।
9. एमएसएमई (MSME) सेक्टर: क्रेडिट गारंटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूती
छोटे और मध्यम उद्योगों को बिना किसी परेशानी के ऋण उपलब्ध कराने के लिए 'क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट' (CGTMSE) की क्षमता बढ़ाई जा सकती है। बजट में एमएसएमई के लिए 'वन-स्टॉप डिजिटल विंडो' बनाने का प्रस्ताव हो सकता है, जिससे पंजीकरण, अनुपालन और ऋण प्राप्ति की प्रक्रिया सुगम हो जाएगी।
यह क्षेत्र रोजगार सृजन का सबसे बड़ा स्रोत है, इसलिए इसके लिए विशेष वित्तीय पैकेज की उम्मीद है।
10. पीएम-किसान निधि और कृषि बुनियादी ढांचा: 8,000 रुपये तक वार्षिक सहायता
कृषि क्षेत्र में संकट को दूर करने के लिए पीएम-किसान सम्मान निधि की राशि को बढ़ाकर 8,000 रुपये वार्षिक किया जा सकता है।
इसके साथ ही 'कृषि अवसंरचना कोष' (AIF) के तहत कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट्स और स्मार्ट फार्मिंग तकनीकों के लिए रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने की योजना का विस्तार होगा। इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
11. ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहन: FAME-III और सोलर सब्सिडी
भारत के नेट-जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 'फेम-3' (FAME-III) योजना की घोषणा इस बजट का मुख्य आकर्षण हो सकती है। इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहनों के पुर्जों के स्थानीय निर्माण पर जोर दिया जाएगा।
साथ ही, 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के लिए सब्सिडी का दायरा बढ़ाकर मध्यम वर्गीय परिवारों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
12. किफायती आवास: पीएम आवास योजना (शहरी व ग्रामीण) के बजट में वृद्धि
'सबके लिए आवास' के लक्ष्य को पूरा करने के लिए पीएम आवास योजना के लिए रिकॉर्ड फंड आवंटित किया जा सकता है। साथ ही, होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रियल एस्टेट क्षेत्र में नई जान फूंक सकता है।
इससे न केवल घर खरीदारों को लाभ होगा, बल्कि सीमेंट और स्टील जैसे सहायक उद्योगों में भी तेजी आएगी।
13. कौशल विकास और युवा रोजगार: डिजिटल स्किलिंग और इंटर्नशिप कार्यक्रम
युवाओं की बेरोजगारी दर को कम करने के लिए बजट में 'स्किल इंडिया डिजिटल' प्लेटफॉर्म के विस्तार और कॉर्पोरेट क्षेत्र के साथ मिलकर नए इंटर्नशिप कार्यक्रमों की घोषणा हो सकती है।
उच्च शिक्षा के लिए 'एजुकेशन लोन' की ब्याज दरों में छूट और शोध के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन को विशेष अनुदान मिलने की उम्मीद है।
14. बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स: गति शक्ति और नेशनल इन्फ्रा पाइपलाइन
सरकार बुनियादी ढांचे पर अपने खर्च को बढ़ाने के लिए नेशनल इन्फ्रा पाइपलाइन को और अधिक पूंजी देगी। लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 14% से घटाकर 8-9% तक लाने के लिए मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और जलमार्गों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
15. स्टार्टअप इकोसिस्टम: एन्जिल टैक्स का सरलीकरण और स्टार्टअप इंडिया फंड
भारत के स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए कर नियमों में और सरलता लाई जाएगी। स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध 'टैक्स हॉलिडे' की पात्रता को बढ़ाया जा सकता है और उभरते क्षेत्रों जैसे एआई और डीप-टेक में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए अलग से 'सीड फंड' का प्रावधान हो सकता है।
