बजट 2026 | उम्मीदें: सरकार ले सकती है ये 10 बड़े फैसले, टैक्स राहत से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक

सरकार ले सकती है ये 10 बड़े फैसले, टैक्स राहत से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक
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बजट 2026 भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी दस्तावेज होगा।

Budget 2026 से बड़ी उम्मीदें हैं। सरकार टैक्स राहत, ₹12.4 लाख करोड़ कैपेक्स, किसान और MSME सपोर्ट समेत 10 बड़े फैसले ले सकती है।

नई दिल्ली: देश की निगाहें अब बजट 2026 पर टिकी हैं। यह बजट सिर्फ सालाना आय-व्यय का हिसाब नहीं, बल्कि भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में सरकार का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।

महंगाई के दबाव, रोजगार की चुनौती और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इस बार बजट से मिडिल क्लास को टैक्स राहत, इंफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश, किसानों और MSME के लिए सपोर्ट और ग्रीन एनर्जी को नई रफ्तार जैसी बड़ी घोषणाओं की उम्मीद जताई जा रही है।

माना जा रहा है कि सरकार इस बजट में 10 बड़े फैसले लेकर विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर सकती है।

​1. जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth): 7.4% की मजबूत रफ्तार और डेटा सुधार

​भारत की अर्थव्यवस्था वर्तमान में दुनिया के लिए 'ब्राइट स्पॉट' बनी हुई है। 7.4% की विकास दर को बनाए रखने के लिए वित्त मंत्री इस बजट में 'थर्ड जनरेशन इकोनॉमिक रिफॉर्म्स' की घोषणा कर सकती हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव जीडीपी के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करना होगा। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि पुराने आधार वर्ष में ई-कॉमर्स, गिग इकोनॉमी और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों का सही वजन शामिल नहीं था।

नया आधार वर्ष लागू होने से न केवल जीडीपी का आकार अधिक वास्तविक दिखेगा, बल्कि यह नीति निर्माताओं को बेहतर आर्थिक फैसले लेने में मदद करेगा।

​2. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): 4.0% का लक्ष्य और उधारी में कमी

​सरकार का लक्ष्य अपनी उधारी को नियंत्रित करना है ताकि देश की रेटिंग में सुधार हो सके। पिछले वित्तीय वर्ष में 4.4% का लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त करने के बाद, अब वित्त मंत्री इसे 4.0% या उससे नीचे लाने का साहसिक रोडमैप पेश करेंगी।

राजकोषीय घाटा कम होने का सीधा लाभ यह होता है कि सरकार को ब्याज चुकाने पर कम खर्च करना पड़ता है, जिससे विकास कार्यों के लिए अधिक फंड बचता है। इसके अलावा, कम सरकारी उधारी से बाजार में निजी क्षेत्र के लिए कर्ज लेना सस्ता और आसान हो जाता है, जो अंततः औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देता है।

​3. पूंजीगत व्यय (Capex): ₹12.4 लाख करोड़ का बुनियादी ढांचा क्रांति

​इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास इस सरकार की पहचान रही है। इस बजट में कैपेक्स को 10.3% की बढ़ोतरी के साथ ₹12.4 लाख करोड़ तक पहुँचाया जा सकता है। यह भारी निवेश केवल सड़कों और पुलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे 'डिजिटल और ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर' की ओर मोड़ा जाएगा।

इसमें 400 नई वंदे भारत ट्रेनों का उत्पादन, 300 से अधिक जिलों को जोड़ते हुए नए एक्सप्रेस-वे और सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट के लिए बुनियादी सुविधाएं तैयार करना शामिल है। यह निवेश न केवल आज रोजगार पैदा करेगा, बल्कि आने वाले दशकों के लिए भारत की व्यापारिक क्षमता को भी बढ़ाएगा।

​4. मध्यम वर्ग को राहत: स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹1 लाख करने की ऐतिहासिक मांग

​देश का मध्यम वर्ग, जो सबसे बड़ा करदाता समूह है, इस बार बड़ी राहत की उम्मीद कर रहा है। महंगाई दर और शहरी जीवन-यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए, वित्त मंत्रालय स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

इसके साथ ही, नई कर व्यवस्था के तहत 13 लाख रुपये तक की आय को पूरी तरह टैक्स फ्री करने की घोषणा हो सकती है। यह कदम न केवल मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ाएगा, बल्कि बाजार में मांग को बढ़ाकर ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों को भी संजीवनी देगा।

​5. कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था: ₹3 लाख करोड़ का 'अन्नदाता' सुरक्षा कवच

​ग्रामीण भारत में खपत बढ़ाने के लिए सरकार एक बड़ा प्रोत्साहन पैकेज ला सकती है। पीएम-किसान सम्मान निधि की राशि में 50% की वृद्धि (₹6000 से ₹9000) की प्रबल संभावना है। इसके अलावा, खेती की लागत घटाने के लिए 'नैनो यूरिया' और 'नैनो डीएपी' के उपयोग पर भारी सब्सिडी दी जा सकती है।

7.7 करोड़ किसानों के लिए ₹5 लाख तक के ब्याज मुक्त कृषि ऋण की सुविधा और 10,000 नए किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के जरिए कृषि उपज के भंडारण और विपणन के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का लक्ष्य रखा जाएगा।

​6. विनिवेश: पीएसयू की 'एसेट मोनिटाइजेशन' नीति

​सरकार अब घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों को केवल बेचने के बजाय उनकी संपत्तियों का उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। आईडीबीआई बैंक के साथ-साथ शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और बीईएमएल जैसी कंपनियों के विनिवेश को इस वित्त वर्ष में पूरा करने की समयसीमा तय की जाएगी।

वित्त मंत्री एक नई और पारदर्शी 'विनिवेश नीति 2.0' ला सकती हैं, जिसमें रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सरकारी कंपनियों में निजी भागीदारी को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे प्राप्त होने वाले लगभग ₹50,000-75,000 करोड़ का उपयोग भविष्य की तकनीकों में निवेश के लिए किया जाएगा।

​7. स्वास्थ्य और चिकित्सा: 'आरोग्य भारत' के लिए रिकॉर्ड आवंटन

​स्वास्थ्य बजट में इस बार 15% से अधिक की वृद्धि की उम्मीद है। प्रधानमंत्री के '75,000 नई मेडिकल सीटें' जोड़ने के विजन को पूरा करने के लिए नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थापना का दूसरा चरण शुरू होगा।

सबसे महत्वपूर्ण घोषणा 'नेशनल कैंसर केयर ग्रिड' की हो सकती है, जिसके तहत देश के हर जिले में कैंसर के इलाज और जांच के लिए ऑन्कोलॉजी क्लीनिक खोले जाएंगे। इसके अतिरिक्त, चिकित्सा अनुसंधान (R&D) के लिए ₹5,000 करोड़ का एक समर्पित 'इनोवेशन फंड' बनाया जाएगा, ताकि भारत सस्ती दवाओं के साथ-साथ नवीन चिकित्सा उपकरणों का भी निर्माण कर सके।

​8. शिक्षा और युवा शक्ति: 'इंटर्नशिप-आधारित' रोजगार मॉडल

​बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार एक नई 'नेशनल इंटर्नशिप स्कीम' का ऐलान कर सकती है। इसके तहत शीर्ष 500 कंपनियों में युवाओं को एक साल की पेड इंटर्नशिप दी जाएगी, जिसका खर्च सरकार और उद्योग साझा करेंगे।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में, डिजिटल यूनिवर्सिटी के विस्तार और 100 नए कौशल केंद्रों की स्थापना का लक्ष्य रखा जाएगा। युवाओं को उद्यमी बनाने के लिए 'मुद्रा योजना' के तहत ऋण की सीमा को ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹30 लाख करने की घोषणा भी इस बजट का हिस्सा हो सकती है, जिससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

​9. एमएसएमई (MSME): छोटे उद्योगों के लिए 'क्रेडिट सेफ्टी नेट'

​देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार 'इनेबलिंग ईकोसिस्टम' तैयार करेगी। एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी योजना के तहत गारंटी मुक्त कर्ज की सीमा बढ़ाई जाएगी।

निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 'डिस्ट्रिक्ट एक्सपोर्ट हब्स' योजना में विशेष फंड आवंटित होगा। छोटे उद्योगों को तकनीकी रूप से अपग्रेड करने के लिए 'डिजिटल एडॉप्शन सब्सिडी' और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर लिस्टिंग के लिए विशेष सहायता देने जैसे ठोस कदम उठाए जाएंगे।

​10. क्लीन मोबिलिटी और ग्रीन एनर्जी: FAME-III और हाइड्रोजन मिशन

​भारत को 2070 तक 'नेट जीरो' बनाने की दिशा में यह बजट बेहद महत्वपूर्ण होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली FAME-III योजना का शुभारंभ हो सकता है, जिसका मुख्य ध्यान इलेक्ट्रिक बसों और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर होगा।

इसके साथ ही, 'ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के लिए ₹15,000 करोड़ का अतिरिक्त आवंटन संभव है। सरकार सोलर रूफटॉप योजना के बजट को भी बढ़ा सकती है ताकि 1 करोड़ से अधिक घरों को मुफ्त बिजली के साथ-साथ अतिरिक्त आय का जरिया मिल सके।

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