संसद के विशेष सत्र में जारी हंगामे के बीच मोदी सरकार ने बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। कानून मंत्रालय ने आधी रात को नोटिफिकेशन जारी कर 'महिला आरक्षण कानून 2023' को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।

भारतीय राजनीति में गुरुवार की आधी रात एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला मोड़ लेकर आई। जब संसद के विशेष सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस चल रही थी, उसी दौरान केंद्रीय कानून मंत्रालय ने एक सनसनीखेज नोटिफिकेशन जारी किया।

इस नोटिफिकेशन के साथ ही 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023' (महिला आरक्षण कानून) आधिकारिक रूप से पूरे देश में प्रभावी हो गया है। सरकार के इस कदम ने न केवल विपक्ष को हैरान कर दिया है, बल्कि देश की विधायी तस्वीर बदलने की दिशा में सबसे बड़ा कानूनी कदम उठा लिया है।

​16 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुआ कानून: क्या कहता है नोटिफिकेशन? 
​कानून मंत्रालय द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रावधान 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी माने जाएंगे। गौरतलब है कि संसद ने इस बिल को सितंबर 2023 में ही पारित कर दिया था, लेकिन इसे लागू करने की तारीख को लेकर सस्पेंस बना हुआ था।

सरकार ने इसे कानूनी रूप से सक्रिय कर दिया है। हालांकि, तकनीकी कारणों और इस समय पर नोटिफिकेशन जारी करने की वजहों को लेकर सरकार ने अभी विस्तार से जानकारी नहीं दी है।

​2029 चुनाव का रास्ता साफ: 850 सीटों वाली लोकसभा में नारी शक्ति 
इस कानून के लागू होने के साथ ही अब 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। वर्तमान में लोकसभा में चल रहे तीन नए विधेयकों का उद्देश्य इसी आरक्षण को जमीन पर उतारना है। प्रावधानों के मुताबिक:-

  • ​लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 850 की जा सकती हैं।
  • ​नई व्यवस्था में कम से कम 270 से ज्यादा महिला सांसद चुनकर संसद पहुँचेंगी।
  • ​राज्यों की विधानसभाओं में भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
  • ​यह आरक्षण अगली जनगणना के आधार पर होने वाले परिसीमन के बाद पूर्ण रूप से प्रभावी होगा।

​प्रियंका गांधी का तीखा हमला: "इसमें राजनीति की बू आती है" 
सरकार के इस कदम पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, "महिला आरक्षण के जिस प्रारूप को हमने पढ़ा है, उसमें साफ लिखा है कि इसे 2029 तक लागू किया जाएगा और इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाया जाएगा।

इसमें गहराई से जाएं तो राजनीति की बू आती है।" प्रियंका ने आरोप लगाया कि 2023 के मूल बिल में जो बातें थीं, उन्हें बदलकर अब 'परिसीमन' और 'चुनावी क्षेत्रों की फेरबदल' का खेल खेला जा रहा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि महिलाओं को बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को अब महिलाएँ पहचान चुकी हैं।

​शुक्रवार को होगी वोटिंग: किरेन रिजिजू की अपील 
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में घोषणा की है कि महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर शुक्रवार शाम 4 बजे वोटिंग होगी। उन्होंने सभी दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इसका समर्थन करने की अपील की है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी दक्षिण भारत के राज्यों की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि सीटों का समायोजन पूरी तरह पारदर्शी होगा और इसमें किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।

आधी रात के फैसले का सियासी असर 
आधी रात को जारी इस नोटिफिकेशन ने यह साबित कर दिया है कि सरकार बैकफुट पर जाने के मूड में नहीं है। जहाँ विपक्ष इसे 'राजनीतिक स्टंट' और 'दक्षिण के राज्यों के साथ अन्याय' बता रहा है, वहीं सरकार ने इसे कानूनी जामा पहनाकर अपने इरादे साफ कर दिए हैं।

अब सबकी नजरें शुक्रवार को होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि भारत का संसदीय ढांचा 2029 तक कितना बदल जाएगा।