आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा को लेकर बुधवार को दिन भर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। पंजाब की भगवंत मान सरकार ने एक अप्रत्याशित फैसले के तहत राघव चड्ढा को मिली 'जेड प्लस' (Z+) श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली।
हालांकि, इस फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सक्रियता दिखाते हुए राघव चड्ढा को 'जेड श्रेणी' की सुरक्षा प्रदान करने का आदेश जारी कर दिया। अब चड्ढा की सुरक्षा का जिम्मा पंजाब पुलिस के बजाय केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के हाथों में होगा।
IB की थ्रेट रिपोर्ट: क्यों दी गई केंद्र द्वारा सुरक्षा?
केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, खुफिया ब्यूरो (IB) की एक ताजा 'थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट' के आधार पर यह फैसला लिया गया है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि राघव चड्ढा की जान को गंभीर खतरा है, जिसके मद्देनजर उन्हें दिल्ली और पंजाब दोनों ही जगहों पर चौबीसों घंटे सुरक्षा कवर मिलना जरूरी है।
गृह मंत्रालय ने दिल्ली और पंजाब पुलिस को सूचित कर दिया है कि अब केंद्रीय बलों के कमांडो उनकी सुरक्षा में तैनात रहेंगे। जानकारों का मानना है कि पंजाब सरकार द्वारा सुरक्षा हटाए जाने को केंद्र ने गंभीरता से लिया और तुरंत 'कवच' प्रदान किया।
पार्टी के भीतर बढ़ती दूरियां और राजनीतिक हलचल
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच कथित तौर पर 'सब कुछ ठीक नहीं' होने की खबरें आ रही हैं। हाल ही में उन्हें राज्यसभा में पार्टी के 'उपनेता' पद से हटाकर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
पंजाब सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा वापस लेने को इसी आंतरिक मतभेद से जोड़कर देखा जा रहा है। AAP ने उन पर आरोप लगाया था कि वे संसद में पंजाब के अहम मुद्दों को उठाने में विफल रहे हैं, जिस पर पलटवार करते हुए चड्ढा ने कहा था कि उन्हें "खामोश किया गया है, पराजित नहीं।"
अर्धसैनिक बलों का पहरा: क्या बदलेगा चड्ढा के लिए?
'जेड' श्रेणी की सुरक्षा मिलने के बाद अब राघव चड्ढा के साथ हर समय लगभग 20 से 22 सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे। इसमें दिल्ली और पंजाब में उनके आवास और यात्रा के दौरान अर्धसैनिक बलों के 4 से 5 कमांडो और पुलिसकर्मी शामिल होंगे।
पंजाब पुलिस के जो जवान उनकी सुरक्षा में तैनात थे, उन्हें वापस मुख्यालय रिपोर्ट करने का आदेश दे दिया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्र का यह कदम राघव चड्ढा को एक बड़ा सियासी संदेश देने की कोशिश है, जबकि पार्टी के भीतर उनके भविष्य को लेकर सस्पेंस बरकरार है।