Middle East Crisis: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की बदलती परिस्थितियों और भारत पर इसके संभावित असर को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार, 27 मार्च को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्यों की तैयारियों की समीक्षा करना और युद्ध से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना है। प्रधानमंत्री ने यह कदम केंद्र द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के ठीक बाद उठाया है, ताकि प्रशासन के हर स्तर पर सतर्कता और तैयारी सुनिश्चित की जा सके।
आपूर्ति चेन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण
बैठक के एजेंडे में सबसे ऊपर युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति चेन में आने वाले व्यवधानों पर चर्चा करना है। प्रधानमंत्री मुख्यमंत्रियों के साथ इस बात पर विचार-विमर्श करेंगे कि कैसे खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होने पर राज्यों में कालाबाजारी और जमाखोरी को रोका जाए।
ऊर्जा संकट और राज्यों के लिए विशेष दिशा-निर्देश
पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है और वहां जारी संघर्ष का सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की उपलब्धता पर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री इस बैठक में राज्यों को ऊर्जा की बचत और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
इसके साथ ही, केंद्र राज्यों को अपने ईंधन भंडार की स्थिति का जायजा लेने और भविष्य की किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश देगा। हॉर्मज में जारी तनाव के कारण आने वाले हफ्तों में ईंधन आपूर्ति में आने वाली किसी भी कमी से निपटने के लिए राज्यों का सहयोग अनिवार्य माना जा रहा है।
प्रवासियों की सुरक्षा और राज्यों के साथ समन्वय
खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग एक करोड़ भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री मुख्यमंत्रियों से उन राज्यों के प्रवासियों का डेटा साझा करने और उनके परिवारों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने का आग्रह करेंगे जो बड़ी संख्या में पश्चिम एशिया में काम कर रहे हैं।
यदि भविष्य में वहां से भारतीयों को बड़े पैमाने पर निकालने की नौबत आती है, तो उनके पुनर्वास और राज्य स्तर पर सहायता प्रदान करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच एक मजबूत समन्वय तंत्र बनाने पर चर्चा होगी।
आंतरिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर पैनी नजर
वैश्विक युद्ध के माहौल में देश के भीतर सांप्रदायिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री इस बैठक के माध्यम से मुख्यमंत्रियों को यह संदेश देंगे कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर घरेलू शांति पर न पड़ने दिया जाए।
राज्यों के खुफिया विभागों और पुलिस प्रशासन को सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और भड़काऊ सूचनाओं पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए जा सकते हैं। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बाहरी संकट के समय देश के भीतर पूरी तरह से एकजुटता और शांति का वातावरण बना रहे।