मालदा में सीएम ममता बनर्जी के हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान एक ड्रोन उनके बेहद करीब देखा गया। इस घटना ने जेड प्लस सुरक्षा के प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

West Bengal Election: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों राज्य के विभिन्न जिलों के दौरे पर हैं। इसी कड़ी में जब वे मालदा पहुंची , तो एक ऐसी घटना घटी जिसने सबको चौंका दिया। दरसल जैसे ही मुख्यमंत्री का हेलिकॉप्टर लैंड करने वाला था, हवा में एक ड्रोन मंडराता हुआ देखा गया। यह ड्रोन हेलिकॉप्टर के इतने करीब था कि कोई भी बड़ी अनहोनी हो सकती थी।

मुख्यमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली विशेष टीम और स्थानीय पुलिस इस घटना से पूरी तरह से हतप्रभ है। 'नो-फ्लाई जोन' होने के बावजूद ड्रोन का वहां होना सुरक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ी सेंध माना जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ममता बनर्जी का चॉपर जैसे ही मालदा हवाई अड्डे के रनवे की ओर बढ़ा, आसमान में एक छोटा ड्रोन दिखाई दिया। यह ड्रोन कुछ देर तक हेलिकॉप्टर की दिशा में ही मंडराता रहा।

पायलट ने मुस्तैदी दिखाते हुए चॉपर को नियंत्रित किया, लेकिन इस दौरान नीचे खड़े अधिकारियों और समर्थकों की सांसें अटक गईं। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत ड्रोन को ट्रैक करने की कोशिश की, लेकिन वह कुछ ही सेकंड मे गायब हो गया। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री को सुरक्षित तरीके से कार तक ले जाया गया, लेकिन पूरे इलाके में तनाव फैल गया।

​जांच के घेरे में सुरक्षा एजेंसियां: आखिर किसका था ड्रोन? 
मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए तय प्रोटोकॉल के अनुसार, उनके कार्यक्रम स्थल और हवाई मार्ग के आसपास किसी भी निजी ड्रोन या फ्लाइंग ऑब्जेक्ट का उड़ना सख्त प्रतिबंधित होता है। इसके बावजूद ड्रोन का वहां पहुंचना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।

मालदा पुलिस और राज्य की खुफिया शाखा ने इस मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच इस दिशा में की जा रही है कि क्या यह किसी फोटोग्राफर की गलती थी या फिर मुख्यमंत्री को डराने या नुकसान पहुंचाने की कोई साजिश। फिलहाल, ड्रोन के ऑपरेटर का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

​राजनीतिक गलियारों में हलचल और बढ़ती सुरक्षा चिंताएं 
इस घटना ने बंगाल की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इसे मुख्यमंत्री की जान को खतरे में डालने की साजिश बताया है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इससे पहले भी ममता बनर्जी के दौरों के दौरान सुरक्षा में चूक के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन ड्रोन का इस तरह करीब आना तकनीकी रूप से अधिक खतरनाक माना जा रहा है।