तमिलनाडु की चुनावी रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का एक बयान देश की राजनीति में तूफान ले आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना ‘आतंकवादी’ से कर दी, जिसके बाद भाजपा ने तीखा हमला बोला और इसे देश का अपमान बताया। बयान पर बढ़ते विवाद के बीच अब खड़गे को सफाई देनी पड़ रही है, लेकिन क्या यह बयान चुनावी माहौल बदल देगा?
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी, संबित पात्रा ने खड़गे के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा का कहना है कि हार के डर से कांग्रेस नेतृत्व अपना मानसिक संतुलन खो बैठा है। पार्टी ने चुनाव आयोग से इस 'अभद्र' टिप्पणी का संज्ञान लेने और खड़गे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना भारत की जनता और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है।
विवाद बढ़ता देख और भाजपा के चौतरफा हमले के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने बयान पर सफाई देना शुरू कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।
खड़गे के मुताबिक, उनका आशय किसी व्यक्तिगत हमले से नहीं बल्कि भाजपा की 'वैचारिक कट्टरता' और विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने की राजनीति से था। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्ष को कुचल रही है, वह एक तरह का 'लोकतांत्रिक आतंक' ही है।
जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं, नेताओं के बयानों की मर्यादा गिरती जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खड़गे का यह बयान भाजपा के लिए एक बड़ा हथियार बन सकता है, जैसा कि पहले 'नीच' और 'मौत का सौदागर' जैसे बयानों के समय हुआ था।
इस विवाद ने तमिलनाडु और बंगाल के चुनावी मुद्दों को पीछे छोड़कर एक बार फिर व्यक्तिगत छींटाकशी को केंद्र में ला दिया है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस इस डैमेज को कैसे कंट्रोल करती है और जनता इस 'आतंकवादी' वाले बयान को किस तरह ले,ती है।