कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में परिसीमन बिल पेश किया। उन्होंने बताया कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 815 हो जाएगी, जिसमें 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की संसदीय व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। गुरुवार को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक, 2026 पेश करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्पष्ट किया कि आगामी परिसीमन के बाद लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़कर 815 हो जाएगी। खास बात यह है कि इसमें महिलाओं के लिए 272 सीटें आरक्षित होंगी, जो कुल संख्या का एक-तिहाई हिस्सा है। मेघवाल ने आश्वासन दिया कि इस प्रक्रिया से किसी भी राज्य या पुरुष सदस्यों को नुकसान नहीं होगा।

हर राज्य में 50 प्रतिशत बढ़ेंगी सीटें
विपक्ष द्वारा परिसीमन के कारण 'उत्तर-दक्षिण विभाजन' (North-South Divide) के आरोपों का जवाब देते हुए कानून मंत्री ने कहा कि सभी राज्यों की सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। उन्होंने दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि किसी भी राज्य की हिस्सेदारी कम नहीं होगी, बल्कि उनकी वर्तमान ताकत बरकरार रहेगी। मेघवाल ने जोर देकर कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए परिसीमन एक आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया है।

SC/ST महिलाओं को मिलेगा कोटा के अंदर कोटा
कानून मंत्री ने सदन को बताया कि महिला आरक्षण के भीतर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान होगा। उन्होंने याद दिलाया कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही पारित हो गया था, लेकिन इसके प्रावधानों को 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर लागू किया जाना तय था। अब सरकार उसी दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है ताकि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उनका हक मिल सके।

विपक्ष की घेराबंदी
विपक्षी दलों ने इस विधेयक के समय और तरीके पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इन बदलावों को 2023 में ही शामिल किया जाना चाहिए था। वहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सरकार पर जल्दबाजी का आरोप लगाते हुए पहले जनगणना कराने की मांग की। इस पर हस्तक्षेप करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने साफ किया कि 'जनगणना 2027' का काम पहले से ही शुरू हो चुका है। शाह ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए यह भी कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण 'असंवैधानिक' है और सरकार इसे स्वीकार नहीं करेगी।