प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने एक आधिकारिक संबोधन को राजनीतिक भाषण में बदल दिया और विपक्ष पर हमला करने के लिए इसका इस्तेमाल किया। खड़गे ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कई गंभीर बातें कहीं।
आधिकारिक मंच के दुरुपयोग का आरोप
खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन जैसे महत्वपूर्ण मंच का इस्तेमाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के लिए किया। उनके मुताबिक यह लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ है और इससे संस्थाओं की मर्यादा कमजोर होती है।
महिलाओं के मुद्दे पर प्राथमिकता पर सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि संबोधन में महिलाओं के मुद्दे पर अपेक्षाकृत कम बात हुई, जबकि विपक्ष और खासकर कांग्रेस का बार-बार जिक्र किया गया। खड़गे के अनुसार इससे यह साफ होता है कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं और महिला सशक्तिकरण को लेकर उसकी प्रतिबद्धता कितनी है।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस का पक्ष
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में रही है। उन्होंने 2010 में राज्यसभा में बिल पास कराने और 2023 में लाए गए बिल को समर्थन देने का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि यह दिखाता है कि कांग्रेस का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है।
परिसीमन को लेकर सरकार पर निशाना
खड़गे ने आरोप लगाया कि जिस प्रस्ताव को महिला आरक्षण से जोड़ा जा रहा है, वह वास्तव में परिसीमन से जुड़ा मामला है। उनके मुताबिक इसे अलग-अलग मुद्दों को मिलाकर पेश किया जा रहा है, जिससे भ्रम पैदा हो रहा है।
प्रधानमंत्री से माफी की मांग
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को देश के सामने सच्चाई रखनी चाहिए और यदि कोई गलत जानकारी दी गई है तो उसके लिए माफी मांगनी चाहिए। खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अपने ही फैसलों और नीतियों को लेकर स्पष्ट नहीं है।
अन्य मुद्दों पर भी उठाए सवाल
खड़गे ने अपने बयान में अर्थव्यवस्था, महंगाई और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार को इन विषयों पर ठोस जवाब देना चाहिए, बजाय इसके कि राजनीतिक आरोप लगाए जाएं।
प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद अब सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर सरकार अपने फैसलों का बचाव कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बना रह सकता है।