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AISHE Report: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने गुरुवाार को केंद्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की। इसमें PHD छात्र की संख्या दोगुनी बताई गई। मप्र का GER पहली बार औसत से अधिक हो गया।

AISHE Report: देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में एडमिशन लेने वालों स्टूडेंट्स की संख्या में साल-दर-साल उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। न्यू एजुकेशन पॉलिसी लागू होने के बाद स्थित और सुधारी हैं। मध्य प्रदेश में पहली बार औसत से ज्ययादा एडमिशन हुए। हालांकि, सकल नामांकन रेशियो (GER) में केरल, तमिलनाडु जैसे राज्य इस बार भी अव्वल हैं।  

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा गुरुवार शाम जारी  केंद्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट में बताया गया कि 2020-21 में देशभर के संस्थानों में 4.14 करोड़ नामांकन हुए थे, जो 2021-22 में बढ़कर 4.33 करोड़ हो गए। सर्वाधिक एडमिशन, ग्रेजुशन स्तर पर हुए हैं। कला में 34.2 प्रतिशत, विज्ञान में (14.8 प्रतिशत), वाणिज्य (13.3 प्रतिशत) और इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी में 11.8 प्रतिशत था।  स्नातकोत्तर स्तर पर सामाजिक विज्ञान में नामांकित छात्रों की संख्या (21.1 प्रतिशत) और साइंस में 14.7 प्रतिशत है। 

पीएचडी 2014-15 में 1.17 लाख की तुलना में 2021-22 में नामांकन 81.2 प्रतिशत बढ़कर 2.12 लाख हो गया। महिला नामांकन 2014-15 में 0.48 लाख से दोगुना होकर 2021-22 में 0.99 लाख हो गया है। उच्च शिक्षा में नामांकन में 2014-15 में 3.42 करोड़ (26.5 प्रतिशत) से लगभग 91 लाख की वृद्धि हुई है।

राष्ट्रीय औसत से आगे निकला मप्र, सीएम मोहन यादव ने दी बधाई 
मध्य प्रदेश में सकल नामांकन अनुपात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2021-22 में राष्ट्रीय औसत 28.4 प्रतिशत रहा, जबकि मप्र 28.9 प्रतिशत के साथ नामांकन संख्या में वृद्धि की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर बधाइ दी है। कहा, नई शिक्षा नीति लागू करने में मध्यप्रदेश तो अग्रणी रहा ही है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विभागीय टीम को बधाई दी। कहा कोविड के बावजूद राष्ट्रीय औसत से आगे निकलना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।  

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु 

  • 2021-22 में महिला नामांकन 2020-21 में 2.01 करोड़ से बढ़कर 2.07 करोड़ हो गया।
  • एससी श्रेणी के छात्रों का नामांकन 2014-15 में 46.07 लाख की तुलना में 2021-22 में 66.23 लाख था, जो 44 प्रतिशत की वृद्धि है।
  • एससी श्रेणी की महिला छात्रों का नामांकन 2020-21 में 29.01 लाख और 2014-15 में 21.02 लाख से बढ़कर 2021-22 में 31.71 लाख हो गया। 2014-15 से इसमें 51 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
  • एसटी श्रेणी के छात्रों का नामांकन 2014-15 में 16.41 लाख से बढ़कर 2021-22 में 27.1 लाख हो गया है- 65.2 प्रतिशत की वृद्धि।
  • ओबीसी छात्रों का नामांकन भी 2014-15 में 1.13 करोड़ से बढ़कर 2021-22 में 1.63 करोड़ हो गया है। ओबीसी महिला छात्रों का नामांकन 2014-15 में 52.36 लाख से बढ़कर 2021-22 में 78.19 लाख हो गया है।
  • अल्पसंख्यक छात्रों का नामांकन 2014-15 में 21.8 लाख से बढ़कर 2021-22 में 30.1 लाख हो गया है, जो 38 प्रतिशत की वृद्धि है।
  • लिंग समानता सूचकांक (जीपीआई), महिला सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) और पुरुष जीईआर का अनुपात, 2021-22 में 1.01 है।
  • 2017-18 से जीपीआई लगातार 1 से ऊपर बनी हुई है। यानी महिला जीईआर लगातार पांचवें वर्ष पुरुष जीईआर से अधिक है।
  • 78.9 प्रतिशत छात्र यूजी स्तर के पाठ्यक्रमों में नामांकित थे। 12.1 प्रतिशत छात्र पीजी स्तर पर नामांकित थे।
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