‘अनपढ़’ शब्द ने सियासत में तूफान खड़ा कर दिया है। एक बयान ने गुजरात को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी- लेकिन क्या यह दावा आंकड़ों पर खरा उतरता है? जब हम आधिकारिक डेटा खंगालते हैं, तो तस्वीर कुछ और ही नजर आती है। Census of India के आंकड़े बताते हैं कि गुजरात की साक्षरता दर देश के कई बड़े राज्यों से बेहतर है। ऐसे में सवाल उठता है- क्या बयान राजनीति है या हकीकत से दूर एक दावा? आइए, राज्यवार शिक्षा दर के जरिए पूरा सच समझते हैं।
क्या कहा था खरगे ने ?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केरल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए खरगे ने गुजरात की जनता को 'अनपढ़' करार दिया, जिससे न केवल गुजरात की अस्मिता बल्कि वहां की दशकों पुरानी शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
राजनीति में अक्सर विरोधी दलों पर प्रहार किए जाते हैं, लेकिन किसी पूरे राज्य की साक्षरता और बुद्धिमत्ता पर उंगली उठाना एक गंभीर राजनीतिक चूक मानी जा रही है।
जब हम भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ों और शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट्स को खंगालते हैं, तो खरगे का यह दावा हकीकत के धरातल पर पूरी तरह से धराशायी नजर आता है।
साक्षरता केवल अक्षरों का ज्ञान नहीं, बल्कि एक राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास का आईना होती है। गुजरात, जो देश का एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र है, उसकी साक्षरता दर न केवल राष्ट्रीय औसत के करीब है बल्कि देश के कई विकसित और बड़े राज्यों से बेहतर स्थिति में है।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या यह बयान केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण और 'उत्तर बनाम दक्षिण' की खाई को गहरा करने के लिए दिया गया है?
आधिकारिक डेटा का विश्लेषण: गुजरात बनाम अन्य राज्य
साक्षरता के मामले में केरल निस्संदेह देश में शीर्ष पर बना हुआ है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं लगाया जा सकता कि अन्य राज्य 'शिक्षा विहीन' या 'अनपढ़' हैं। सांख्यिकी के नजरिए से देखें तो गुजरात की साक्षरता दर करीब 78.0% है।
यह आंकड़ा उन राज्यों के लिए एक चुनौती है जो खुद को शिक्षा का केंद्र मानते हैं। उदाहरण के तौर पर, गुजरात की साक्षरता दर पंजाब (75.8%), पश्चिम बंगाल (76.3%) और कर्नाटक (75.4%) जैसे राज्यों से भी अधिक है।
इतना ही नहीं, यदि हम उत्तर भारत के बड़े राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश (67.7%), राजस्थान (66.1%) और विशेषकर बिहार (61.8%) से तुलना करें, तो गुजरात शिक्षा के बुनियादी ढांचे और पहुंच के मामले में कोसों आगे खड़ा दिखाई देता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गुजरात की साक्षरता दर में महिला शिक्षा और ग्रामीण साक्षरता के प्रति चलाए गए अभियानों का बड़ा योगदान रहा है। ऐसे में एक विकसित राज्य की जनता को 'अनपढ़' की श्रेणी में रखना न केवल आंकड़ों के साथ मजाक है, बल्कि उस राज्य के करोड़ों छात्रों और शिक्षकों के परिश्रम का अपमान भी है।
यह कड़वाहट उस समय और बढ़ जाती है जब एक राष्ट्रीय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अपनी चुनावी हार का दोष जनता की 'शिक्षा' या 'समझ' पर मढ़ने लगता है।
भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की साक्षरता दर
- केरल: 93.9%
- लक्षद्वीप: 91.8%
- मिजोरम: 91.3%
- गोवा: 88.7%
- त्रिपुरा: 87.2%
- दमन और दीव: 87.1%
- अंडमान और निकोबार: 86.6%
- दिल्ली: 86.2%
- चंडीगढ़: 86.0%
- पुडुचेरी: 85.8%
- हिमाचल प्रदेश: 82.8%
- महाराष्ट्र: 82.3%
- सिक्किम: 81.4%
- तमिलनाडु: 80.1%
- नगालैंड: 79.6%
- मणिपुर: 79.2%
- उत्तराखंड: 78.8%
- गुजरात: 78.0%
- दादरा और नगर हवेली: 76.2%
- पश्चिम बंगाल: 76.3%
- पंजाब: 75.8%
- हरियाणा: 75.6%
- कर्नाटक: 75.4%
- मेघालय: 74.4%
- ओडिशा: 72.9%
- असम: 72.2%
- छत्तीसगढ़: 70.3%
- मध्य प्रदेश: 69.3%
- उत्तर प्रदेश: 67.7%
- जम्मू और कश्मीर: 67.2%
- आंध्र प्रदेश: 67.0%
- झारखंड: 66.4%
- राजस्थान: 66.1%
- अरुणाचल प्रदेश: 65.4%
- तेलंगाना: 66.5%
- बिहार: 61.8%
विवादित बयानों का इतिहास: जब-जब फिसली खरगे की जुबान
- रावण वाला बयान (नवंबर 2022, गुजरात): गुजरात चुनाव के दौरान खरगे ने पीएम मोदी की तुलना रावण से करते हुए कहा था, "क्या आपके पास रावण की तरह 100 सिर हैं?"
- कुत्ते वाला बयान (दिसंबर 2022, राजस्थान): अलवर में उन्होंने कहा था, "क्या आपके (बीजेपी) घर से कोई कुत्ता भी देश के लिए मरा है?"
- मौत की कामना वाला बयान (मार्च 2026, राज्यसभा): उन्होंने कहा था, "जब तक मोदी को सत्ता से नहीं हटा दूंगा, तब तक मरूंगा नहीं।"
- सनातन धर्म पर विवाद: उदयनिधि स्टालिन के सनातन विरोधी बयानों पर खरगे की चुप्पी को बीजेपी ने 'हिंदू विरोधी' करार दिया था।
ताजा विवाद: केरल की रैली में गुजरात को 'अनपढ़' बताया
मल्लिकार्जुन खरगे ने 5 अप्रैल 2026 को केरल के इडुक्की में एक चुनावी रैली में कहा:-
"केरल के लोग बहुत चतुर और शिक्षित हैं। मोदी जी और पिनाराई विजयन, आप दोनों मिलकर गुजरात या अन्य जगहों के अनपढ़ लोगों को तो बेवकूफ बना सकते हैं, लेकिन केरल के लोगों को नहीं।"
बीजेपी और गुजरात सरकार का तीखा पलटवार
सीएम भूपेंद्र पटेल: "यह 6 करोड़ गुजरातियों का अपमान है। यह गांधी और सरदार पटेल की धरती की गरिमा को ठेस पहुँचाता है।"
सुधांशु त्रिवेदी : "क्या गांधी जी और सरदार पटेल भी अनपढ़ थे? कांग्रेस उत्तर-दक्षिण की विभाजनकारी राजनीति कर रही है।"
शहजाद पूनावाला: "कांग्रेस जब चुनाव हारती है, तो जनता को गाली देने लगती है। यह हार की बौखलाहट है।"