BJP स्थापना दिवस पर जानिए 1980 से 2026 तक का पूरा सफर। अटल-आडवाणी से मोदी-शाह युग तक, 2 सीटों से 303 तक पहुंची भाजपा की राजनीति, संगठन और विचारधारा की पूरी कहानी।

भारतीय राजनीति के इतिहास में 6 अप्रैल 1980 की तारीख एक नए युग की शुरुआत थी। वही भारतीय जनता पार्टी अपने गौरवशाली सफर के 47 साल पूरे कर रही है। 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प और अंत्योदय के आदर्शों के साथ शुरू हुई यह यात्रा आज भाजपा को दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में स्थापित कर चुकी है।

1984 के चुनाव में मात्र 2 सीटों से अपने संसदीय सफर की शुरुआत करने वाली भाजपा, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में न केवल केंद्र में पूर्ण बहुमत के साथ सत्तासीन है, बल्कि देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपना परचम लहरा रही है।

​अटल-आडवाणी के दौर से शुरू होकर मोदी-शाह के इस युग तक, भाजपा ने वैचारिक दृढ़ता और संगठनात्मक कौशल के दम पर भारतीय लोकतंत्र की परिभाषा को नए आयाम दिए हैं।

स्थापना दिवस के इस विशेष अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत तमाम दिग्गज नेताओं ने करोड़ों कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए 'विकसित भारत' के संकल्प को दोहराया है।

​भाजपा का जन्म: 6 अप्रैल 1980 और 'कमल' का खिलना 
जनता पार्टी से अलग होने के बाद 6 अप्रैल 1980 को 'भारतीय जनता पार्टी' (BJP) की औपचारिक स्थापना हुई। अटल बिहारी वाजपेयी पार्टी के पहले अध्यक्ष बने। उस समय मुंबई के अधिवेशन में वाजपेयी जी ने प्रसिद्ध नारा दिया था-"अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।"

शुरुआत कठिन थी; 1984 के चुनाव में पार्टी महज 2 सीटों पर सिमट गई थी। लेकिन 1990 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन और लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा ने भाजपा को मुख्यधारा की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया।

​भाजपा के अब तक के सारथी: अध्यक्षों का सफर  

जनसंघ काल: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी।
भाजपा काल: अटल बिहारी वाजपेयी (1980-86), लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कुशाभाऊ ठाकरे, बंगारू लक्ष्मण, जना कृष्णमूर्ति, एम. वेंकैया नायडू, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह जे.पी. नड्डा, वर्तमान में नितिन नवीन।

​सत्ता का विस्तार: तब और अब की स्थिति

शुरुआती दौर: 1980-90 के दशक तक भाजपा की सरकारें केवल राजस्थान, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे गिने-चुने राज्यों तक सीमित थीं। दक्षिण और उत्तर-पूर्व भारत में पार्टी का कोई अस्तित्व नहीं था।

वर्तमान स्थिति (2026): आज भाजपा का शासन देश के आधे से अधिक भूभाग पर है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, असम, त्रिपुरा, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में भाजपा की अपनी या गठबंधन की सरकारें हैं। पार्टी अब 'अजेय' चुनावी मशीन बन चुकी है।

​अटल-आडवाणी बनाम मोदी-शाह की भाजपा: वैचारिक और रणनीतिक अंतर

अटल-आडवाणी युग - उदारवादी और गठबंधन की राजनीति : वाजपेयी जी के दौर में भाजपा एक 'उदारवादी' छवि के साथ आगे बढ़ी। वह गठबंधन (NDA) चलाने के माहिर थे और विचारधारा के बजाय 'सर्वसम्मति' पर जोर देते थे। आडवाणी जी ने संगठन खड़ा किया और वाजपेयी जी ने उसे जन-स्वीकार्यता दिलाई।

मोदी-शाह युग - आक्रामक राष्ट्रवाद और चुनावी मशीन : 2014 के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी। अब पार्टी 'गठबंधन की मजबूरी' के बजाय 'पूर्ण बहुमत' और 'स्पष्ट विचारधारा' (धारा 370, राम मंदिर, CAA) पर केंद्रित है। मोदी जी की लोकप्रियता और अमित शाह के सांगठनिक कौशल (पन्ना प्रमुख मॉडल) ने भाजपा को एक ऐसी चुनावी ताकत बना दिया है जो साल के 365 दिन चुनाव के लिए तैयार रहती है।

​2014 के बाद आमूल-चूल परिवर्तन: एक नई भाजपा 

साल 2014 भारतीय राजनीति का 'टर्निंग पॉइंट' था। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा में जो बदलाव आए, वे ऐतिहासिक हैं:

डिजिटल और डाटा पॉलिटिक्स: भाजपा ने तकनीक और सोशल मीडिया को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।
कल्याणकारी राजनीति: लाभार्थी वर्ग (उज्ज्वला, आवास, मुफ्त राशन) के रूप में एक नया वोट बैंक तैयार किया, जो जाति और धर्म की सीमाओं से परे है।
राष्ट्रवाद का नया नैरेटिव: सर्जिकल स्ट्राइक और आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस जैसी नीतियों ने मध्यम वर्ग में भाजपा की पकड़ मजबूत की।
संगठनात्मक विस्तार: 'सदस्यता अभियान' के जरिए भाजपा ने खुद को 18 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ विश्व की सबसे बड़ी पार्टी बनाया।

जनसंघ के दीपक से विश्व के शिखर तक 

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस विचार के लिए बलिदान दिया, उसे आज मोदी-शाह की भाजपा ने हकीकत में बदला है। धारा 370 का खात्मा और भव्य राम मंदिर का निर्माण जनसंघ के समय के वो संकल्प थे, जो आज पूरे हो चुके हैं। आज भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की 'धुरी' बन चुकी है, जिसके इर्द-गिर्द पूरी सियासत घूमती है।

भाजपा की पहली सरकार: कब और कहां ?
भाजपा के गठन (1980) के बाद, किसी राज्य में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का गौरव राजस्थान को प्राप्त हुआ।

वर्ष 1990: यह भाजपा के लिए एक ऐतिहासिक साल था। राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया और भैरों सिंह शेखावत के नेतृत्व में पहली बार राज्य में भाजपा की सरकार बनी।
उसी कालखंड में: 1990 के आसपास ही मध्य प्रदेश में सुंदरलाल पटवा और हिमाचल प्रदेश में शांता कुमार के नेतृत्व में भाजपा ने अपनी सरकारें बनाईं।
गठबंधन की शुरुआत: इससे पहले 1967 में जनसंघ के रूप में पार्टी ने उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में 'संयुक्त विधायक दल' (SVD) की सरकारों में हिस्सा लिया था, लेकिन शुद्ध रूप से भाजपा की पहली पूर्ण सरकार 1990 के दौर में ही मजबूत हुई।
अब तक का सफर: राज्यों में सत्ता का विस्तारभाजपा ने क्षेत्रीय राजनीति से निकलकर पैन-इंडिया पार्टी बनने तक का लंबा सफर तय किया है।
​शुरुआती दौर (1980-1990): इस दौरान भाजपा मुख्य रूप से 'हिंदी पट्टी' (राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल) की पार्टी मानी जाती थी। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में पार्टी का जनाधार न के बराबर था।

विस्तार का दौर (1995-2013): 1995 में गुजरात में पहली बार भाजपा ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई (केशुभाई पटेल मुख्यमंत्री बने), जो आज भी पार्टी का सबसे मजबूत किला है। इसी दौरान दिल्ली और महाराष्ट्र (गठबंधन) में भी भाजपा सत्ता में आई।
मोदी-शाह युग (2014-वर्तमान): 2014 के बाद भाजपा ने उन राज्यों में भी सरकार बनाई जहाँ कभी उसे 'अछूत' माना जाता था।
पूर्वोत्तर भारत: असम, त्रिपुरा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
दक्षिण भारत: कर्नाटक में भाजपा ने अपने दम पर सरकार बनाकर दक्षिण में अपना द्वार खोला।
ओडिशा: हाल के वर्षों में ओडिशा में भी भाजपा ने अपनी स्वतंत्र सरकार बनाकर सबको चौंका दिया।

वर्तमान स्थिति (अप्रैल 2026 तक का अनुमानित डेटा) 

​वर्तमान में भाजपा और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का दबदबा देश के बड़े हिस्से पर है:-

वर्तमान में भाजपा करीब 12 से 15 राज्यों में सीधे या मुख्य सत्ताधारी दल के रूप में काबिज है। इनमें प्रमुख राज्य हैं:

  1. उत्तर प्रदेश (योगी आदित्यनाथ)
  2. ​मध्य प्रदेश (मोहन यादव)
  3. ​राजस्थान (भजन लाल शर्मा)
  4. ​गुजरात (भूपेंद्र पटेल)
  5. ​ओडिशा (मोहन चरण माझी)
  6. ​उत्तराखंड (पुष्कर सिंह धामी)
  7. ​असम (हिमंता बिस्वा सरमा)
  8. ​हरियाणा (नायब सिंह सैनी)
  9. ​छत्तीसगढ़ (विष्णु देव साय)
  10. ​अरुणाचल प्रदेश (पेमा खांडू)
  11. ​गोवा (प्रमोद सावंत)
  12. ​त्रिपुरा (माणिक साहा)
  13. ​मणिपुर (एन. बीरेन सिंह)​
  14. महाराष्ट्र: (देवेंद्र फडणवीस)

भाजपा शासित केंद्र शासित प्रदेश

  • ​दिल्ली: रेखा गुप्ता (भाजपा की पूर्ण बहुमत सरकार)
  • ​पुडुचेरी: एन. रंगास्वामी (भाजपा-AINRC गठबंधन

एनडीए (NDA) गठबंधन शासित राज्य (मुख्यमंत्री सहयोगी दल से) 

  • बिहार: नीतीश कुमार (JDU)
  • ​आंध्र प्रदेश: एन. चंद्रबाबू नायडू (TDP)
  • ​सिक्किम: प्रेम सिंह तमांग (SKM)
  • ​मेघालय: कॉनराड संगमा (NPP)
  • ​नागालैंड: नेफियू रियो (NDPP)