Amit Shah in Lok Sabha: लोकसभा में चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद या माओवाद का विकास से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विचारधारा केवल हथियारों के दम पर सत्ता हथियाने के लिए फैलाई गई थी। शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके समय में इस विचारधारा को स्वीकार किया गया, जिसके कारण छत्तीसगढ़ सहित 12 राज्यों में 'रेड कॉरिडोर' बन गया और सैकड़ों युवाओं को अपनी जान गंवानी पड़ी।
बस्तर से हटा 'लाल आतंक' का साया
गृह मंत्री ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा, "बस्तर के लोग इसलिए पीछे रह गए क्योंकि वहां लाल आतंक का साया था और विकास वहां तक नहीं पहुंच पा रहा था। आज वह साया हट गया है और बस्तर विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।" शाह ने उन सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों को भी श्रद्धांजलि दी जिन्होंने इस लड़ाई में अपनी जान गंवाई।
हथियार उठाने वालों को चुकानी होगी कीमत
संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए अमित शाह ने कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर किसी को अन्याय महसूस होता है, तो संविधान में उसके लिए रास्ते मौजूद हैं, लेकिन हथियार उठाना कोई समाधान नहीं है। शाह ने दोटूक कहा, "जो लोग नक्सलवाद की वकालत करते हैं, वे जान लें कि हथियार उठाने वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। मोदी सरकार ऐसे लोगों को हर हाल में जवाबदेह ठहराएगी।"
कांग्रेस से पूछे तीखे सवाल
अमित शाह ने कांग्रेस से पूछा कि आजादी के बाद के 60 सालों में उन्होंने आदिवासियों के लिए क्या किया? उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आदिवासियों के इलाकों में स्कूल, मोबाइल टावर और बैंकिंग सुविधाएं इसलिए नहीं पहुंचने दीं क्योंकि इससे उनकी विचारधारा का "अवैध शासन" प्रभावित होता। शाह ने कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद ही आदिवासियों को घर, स्वच्छ पानी और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलनी शुरू हुई हैं।
नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम प्रहार
गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि भारत में माओवाद अब अपने अंत के करीब है। पिछले 12 वर्षों के कार्यों का लेखा-जोखा देते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और सरकार की विकास योजनाओं ने नक्सलियों के आधार को खत्म कर दिया है। अब वे दिन दूर नहीं जब भारत पूरी तरह से नक्सल मुक्त होगा।