दिल्ली में 'बिन बरसे' ही बह गए लाखों रुपये: आर्टिफिशियल बारिश के नाम पर 37.93 लाख का खर्च!

आर्टिफिशियल बारिश के नाम पर 37.93 लाख का खर्च!
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योजना के मुताबिक, विशेष विमानों के जरिए बादलों पर रसायनों का छिड़काव किया जाना था।

प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारियों को गोपनीय रखा गया था, जिससे अब सरकारी बजट के प्रबंधन और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

नई दिल्ली : दिल्ली के दमघोंटू प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए सरकार ने जिस 'क्लाउड सीडिंग' का सपना दिखाया था, वह अब सवालों के घेरे में है।

एक ताजा RTI रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिस प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली में एक बूंद भी कृत्रिम बारिश नहीं हुई, उस पर प्रशासन ने करीब 37.93 लाख रुपये खर्च कर दिए।

इस खुलासे ने न केवल सरकारी दावों की हवा निकाल दी है, बल्कि जनता के पैसे के इस्तेमाल पर भी बहस छेड़ दी है।

बिना बारिश के खर्च हुए 37.93 लाख रुपये

RTI के जरिए मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली में क्लाउड सीडिंग के प्रयोग के लिए कुल 37.93 लाख रुपये की राशि आवंटित और खर्च की गई।

यह प्रोजेक्ट प्रदूषण के चरम स्तर के दौरान हवा को साफ करने के लिए प्रस्तावित था। चौंकाने वाली बात यह है कि रिकॉर्ड के अनुसार धरातल पर कोई वास्तविक बारिश नहीं कराई गई, फिर भी बजट का एक बड़ा हिस्सा 'तैयारियों' और 'तकनीकी प्रक्रियाओं' के नाम पर खर्च दिखाया गया है।

गोपनीयता और सूचना छिपाने का आरोप

इस पूरे प्रोजेक्ट को लेकर शुरुआत से ही काफी गोपनीयता बरती गई। RTI रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि संबंधित विभाग इस खर्च और प्रोजेक्ट की बारीकियों को साझा करने में कतरा रहे थे।

विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि "सीक्रेसी" का सहारा लेकर इस विफल प्रोजेक्ट के वित्तीय पहलुओं को जनता की नजरों से दूर रखने की कोशिश की गई, जिससे भ्रष्टाचार की आशंकाओं को बल मिलता है।

IIT कानपुर और तकनीकी अड़चनों का हवाला

इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी मुख्य रूप से आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों को सौंपी गई थी। योजना के मुताबिक, विशेष विमानों के जरिए बादलों पर रसायनों का छिड़काव किया जाना था।

हालांकि, प्रोजेक्ट के धरातल पर न उतर पाने के पीछे कई कारण बताए गए, जिनमें नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से अनुमति मिलने में देरी, उपयुक्त बादलों की कमी और सुरक्षा प्रोटोकॉल शामिल थे। लेकिन सवाल यही बना हुआ है कि जब अनुमति और परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं, तो इतना बड़ा फंड किस आधार पर जारी किया गया।

प्रदूषण के नाम पर बजट की बर्बादी पर सवाल

दिल्ली हर साल सर्दियों में प्रदूषण की मार झेलती है, और आर्टिफिशियल बारिश को एक 'जादुई समाधान' के तौर पर पेश किया गया था। अब इस RTI खुलासे के बाद पर्यावरणविदों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

आलोचकों का कहना है कि प्रदूषण कम करने के बुनियादी उपायों पर ध्यान देने के बजाय, ऐसे महंगे और अनिश्चित प्रयोगों पर जनता का पैसा खर्च करना केवल एक 'पब्लिसिटी स्टंट' जैसा प्रतीत होता है।

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