जेएनयू प्रशासन सख्त: विवादित नारेबाजी मामले में 9 छात्रों पर FIR, यूनिवर्सिटी से निष्कासन की तैयारी

विवादित नारेबाजी मामले में 9 छात्रों पर FIR, यूनिवर्सिटी से निष्कासन की तैयारी
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​साबरमती हॉस्टल के बाहर जुटे करीब 30 से 35 छात्रों के समूह ने यह कार्यक्रम आयोजित किया था।

जेएनयू प्रशासन ने 5 जनवरी की रात साबरमती हॉस्टल के बाहर हुई भड़काऊ नारेबाजी पर सख्त रुख अपनाया है।

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। 5 जनवरी की रात साबरमती हॉस्टल के बाहर आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक नारेबाजी की गई।

इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद जेएनयू प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे 'नफरत की प्रयोगशाला' बनाने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी दी है। प्रशासन ने साफ किया है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और न्यायिक अवमानना को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​भड़काऊ नारेबाजी और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना

​साबरमती हॉस्टल के बाहर जुटे करीब 30 से 35 छात्रों के समूह ने यह कार्यक्रम आयोजित किया था। आरोप है कि उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद छात्रों ने उत्तेजक नारेबाजी शुरू कर दी।

प्रशासन का मानना है कि ये नारे न केवल भड़काऊ थे, बल्कि सीधे तौर पर देश की सर्वोच्च अदालत की अवमानना के दायरे में आते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय विचारों के आदान-प्रदान का केंद्र है, न कि नफरत फैलाने का मंच।

​प्रशासन की पुलिसिया कार्रवाई और FIR की मांग

​घटना की गंभीरता को देखते हुए जेएनयू के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ने दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत दी है। वसंत कुंज पुलिस स्टेशन को भेजे गए पत्र में अदिति मिश्रा और गोपिका बाबू सहित कुल नौ छात्रों को नामजद करने के लिए पत्र लिखा है।

विश्वविद्यालय ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। हालांकि, ताजा जानकारी के अनुसार पुलिस मामले की जांच कर रही है और वीडियो साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है।

​छात्रों पर निलंबन और निष्कासन की तलवार

​विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले छात्रों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अपराध की गंभीरता के आधार पर दोषी छात्रों को परिसर से निलंबित किया जा सकता है, हॉस्टल से निकाला जा सकता है या फिर विश्वविद्यालय से स्थायी रूप से निष्कासित किया जा सकता है।

प्रशासन ने कहा कि कैंपस की शांति और लोक व्यवस्था को भंग करने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

​छात्र संघ का पक्ष और वैचारिक मतभेद

​दूसरी ओर, जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि लगाए गए नारे पूरी तरह से वैचारिक थे और किसी भी व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमला नहीं किया गया था। मिश्रा ने अपने बयान में तर्क दिया कि उनका विरोध उस विचारधारा के खिलाफ है जिसका प्रतिनिधित्व सत्ता पक्ष कर रहा है। छात्र संघ इस पूरी कार्रवाई को छात्रों की आवाज दबाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार के रूप में देख रहा है।

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