Budget 2026: नौकरीपेशा को बड़ी राहत की उम्मीद- ₹50,000 से बढ़कर ₹1 लाख हो सकता है स्टैंडर्ड डिडक्शन

यह कदम सीधे तौर पर देश के करोड़ों वेतनभोगी परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा।
नई दिल्ली: बजट 2026 की तैयारियों के बीच देश के दो सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों, ICAI और SBI, ने वित्त मंत्रालय को अपने बजट पूर्व सुझाव भेज दिए हैं। इन सुझावों में सबसे प्रमुख मांग स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) की सीमा को वर्तमान के 50,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 1,00,000 रुपये करने की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में जीवन-यापन की लागत और मुद्रास्फीति में जो वृद्धि हुई है, उसे देखते हुए यह बदलाव नौकरीपेशा वर्ग के लिए अनिवार्य हो गया है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख करने का प्रस्ताव
ICAI ने अपने प्री-बजट मेमोरेंडम में स्पष्ट किया है कि वेतनभोगी कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा दोगुनी की जानी चाहिए।
वर्तमान में यह 50,000 रुपये है, जो 2019 में तय की गई थी। SBI के अर्थशास्त्रियों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन को 1 लाख रुपये करने से मध्यम वर्ग की 'डिस्पोजेबल इनकम' (हाथ में बचने वाला पैसा) बढ़ेगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था में खपत को बढ़ावा मिलेगा।
नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) को अधिक आकर्षक बनाने पर जोर
सरकार का मुख्य ध्यान करदाताओं को 'न्यू टैक्स रिजीम' की ओर स्थानांतरित करना है। SBI की रिपोर्ट के अनुसार, यदि सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन में बड़ी बढ़ोतरी करती है, तो यह नई कर व्यवस्था को अपनाने वाले लोगों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन होगा।
इससे न केवल व्यक्तिगत बचत बढ़ेगी, बल्कि टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया भी सरल होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि 13 लाख रुपये तक की आय को पूरी तरह टैक्स फ्री करने के लक्ष्य की दिशा में यह पहला और सबसे ठोस कदम हो सकता है।
महंगाई और जीवन-यापन की लागत का बढ़ता दबाव
ICAI ने तर्क दिया है कि पिछले 5-6 वर्षों में किराया, परिवहन और बुनियादी जरूरतों की कीमतों में भारी उछाल आया है। चूंकि व्यापारियों को अपने खर्चों को लाभ से घटाने की अनुमति होती है, लेकिन वेतनभोगियों के पास केवल स्टैंडर्ड डिडक्शन का ही विकल्प होता है।
ऐसे में इसकी सीमा बढ़ाना सामाजिक न्याय और आर्थिक संतुलन के लिए जरूरी है। इससे खासकर उन लोगों को लाभ होगा जो कम या मध्यम वेतन सीमा में आते हैं।
आर्थिक विकास और उपभोग पर पड़ने वाला सकारात्मक प्रभाव
SBI की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, अगर टैक्सपेयर्स के पास ज्यादा पैसा बचता है, तो वे उसे बाजार में खर्च करेंगे। इससे ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और रिटेल सेक्टर में मांग बढ़ेगी।
बजट 2026 में इस राहत की उम्मीद इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि सरकार आगामी चुनावों और आर्थिक सुधारों के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही है। यह कदम सीधे तौर पर देश के करोड़ों वेतनभोगी परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा।
क्या होता है स्टैंडर्ड डिडक्शन और टैक्सपेयर्स के लिए क्यों है यह जरूरी?
स्टैंडर्ड डिडक्शन आयकर में मिलने वाली वह निश्चित छूट है, जो किसी भी वेतनभोगी कर्मचारी या पेंशनभोगी की कुल सालाना आय में से सीधे घटा दी जाती है।
इसके लिए करदाता को निवेश के कोई दस्तावेज या खर्च की रसीदें दिखाने की जरूरत नहीं होती। सरल शब्दों में कहें तो, यदि आपकी सालाना आय 10 लाख रुपये है और वर्तमान स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये है, तो आपकी टैक्स की गणना केवल 9.5 लाख रुपये पर की जाएगी।
चूँकि वेतनभोगी कर्मचारियों के पास बिजनेस क्लास की तरह अपने खर्चों
को दिखाने का विकल्प नहीं होता, इसलिए सरकार उन्हें यह एकमुश्त राहत देती है।
अब इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की मांग की जा रही है, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच आम आदमी की 'टेक होम सैलरी' बढ़ सके।
