JNU में आधी रात भारी बवाल: PM मोदी और शाह के खिलाफ लगे 'कब्र खुदेगी' के नारे, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भड़का आक्रोश

PM मोदी और शाह के खिलाफ लगे कब्र खुदेगी के नारे, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भड़का आक्रोश
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मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने अपनी जांच की गति तेज कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने के बाद JNU के साबरमती हॉस्टल के बाहर छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया।

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में है। सोमवार, 5 जनवरी 2026 की रात को कैंपस में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया जब छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी की।

यह विरोध प्रदर्शन दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद शुरू हुआ।

साबरमती हॉस्टल के बाहर हुए इस प्रदर्शन ने अब एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है, जिसमें बीजेपी और विपक्षी नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। यह घटना रात के अंधेरे में हुई, जिसने कैंपस के सुरक्षा इंतज़ामों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।



सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कैंपस में भड़का गुस्सा

सोमवार को जैसे ही सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के आरोपी उमर खालिद और देशद्रोह के आरोपी शरजील इमाम को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कीं, जेएनयू कैंपस के भीतर माहौल गर्म हो गया।

JNUSU के नेतृत्व में वामपंथी संगठनों से जुड़े सैकड़ों छात्र साबरमती हॉस्टल के बाहर जमा हो गए और शीर्ष अदालत के फैसले के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

छात्रों का आरोप है कि न्यायपालिका और सरकार मिलकर उनके नेताओं को निशाना बना रही है, जबकि पुलिस प्रशासन इसे पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों पर आधारित फैसला बता रहा है।

'कब्र खुदेगी' जैसे विवादित नारों से गरमाया माहौल

प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब बेहद संवेदनशील हो गई जब छात्रों के समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और प्रमुख उद्योगपतियों के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया।

प्रदर्शनकारियों ने 'मोदी-शाह तेरी कब्र खुदेगी' और 'अंबानी-अडानी राज की कब्र खुदेगी, JNU की धरती पर' जैसे तीखे और भड़काऊ नारे लगाए। इन नारों के कई कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें भीड़ के बीच JNUSU के संयुक्त सचिव दानिश और सचिव सुनील की सक्रिय मौजूदगी की बात भी सामने आ रही है।

इस नारेबाजी ने न केवल प्रशासनिक अमले में खलबली मचा दी है, बल्कि इसे देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे व्यक्तियों का अपमान भी माना जा रहा है।

शरजील और खालिद पर गंभीर आरोपों का साया

प्रदर्शनकारी छात्र जिन दो चेहरों के समर्थन में उतरे थे, उन पर लगे कानूनी आरोप काफी गंभीर और राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े हैं।

शरजील इमाम पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है, क्योंकि उन पर आरोप है कि उन्होंने 'चिकेन नेक' कॉरिडोर को काटकर नॉर्थ-ईस्ट को भारत के नक्शे से अलग करने की साजिश रचने वाली बातें कही थीं।

दूसरी ओर, उमर खालिद पर 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की गहरी साजिश रचने का गंभीर मामला दर्ज है। इन दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज होने को छात्र समुदाय का एक धड़ा 'लोकतांत्रिक आवाजों का दमन' बता रहा है, जबकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सबूतों की गंभीरता को देखते हुए ही अदालत ने उन्हें राहत नहीं दी है।

नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया: 'देश की एकता के लिए खतरा'

इस आपत्तिजनक नारेबाजी पर सियासी गलियारों में जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "JNU 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' और राहुल गांधी जैसे राष्ट्रविरोधी सोच रखने वाले लोगों का अड्डा बन चुका है, चाहे वे RJD, TMC या वामपंथी दलों से जुड़े हों। उन्हें याद रखना चाहिए कि यह भारत है, 21वीं सदी का नरेंद्र मोदी का भारत। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि भगवा ही जीतेगा... मैं 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' को चेतावनी देता हूं कि उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे लोगों का समर्थन करने वाले, जो पाकिस्तान की पक्षधर सोच रखते हैं और चिकन नेक कॉरिडोर को अलग करने की बात करते हैं, वे स्पष्ट रूप से देशद्रोही हैं।"

यह बयान सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज करने के बाद JNU में हुए प्रदर्शन के संदर्भ में आया है।

बीजेपी विधायक अरविंदर सिंह लवली ने इस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि देश में संविधान और न्याय व्यवस्था से ऊपर कोई नहीं है और जो लोग अदालत के फैसले का इस तरह हिंसक भाषा में विरोध कर रहे हैं, वे देश की एकता और अखंडता के लिए बड़ा खतरा हैं।

वहीं, बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने इसे 'सपोलों का फन कुचलने' जैसी स्थिति बताया, जिससे छात्रों में बौखलाहट है। दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसे शर्मनाक कृत्य करार दिया है, जबकि कांग्रेस नेता उदित राज ने भी इस घटनाक्रम पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए इसे गंभीर बताया है।

5 जनवरी 2020 की हिंसा का काला इतिहास

जेएनयू में यह ताजा प्रदर्शन 5 जनवरी की उस बरसी पर हुआ, जिसका कैंपस के इतिहास में एक काला और दर्दनाक महत्व है।

5 जनवरी 2020 की शाम को जेएनयू कैंपस में नकाबपोश हमलावरों की एक बेकाबू भीड़ ने घुसकर साबरमती समेत तीन हॉस्टलों में छात्रों और शिक्षकों पर लाठियों, पत्थरों और लोहे की छड़ों से जानलेवा हमला किया था।

जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि छात्र हर साल इस दिन हुई हिंसा की निंदा करने और एकजुटता दिखाने के लिए एकत्र होते हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस बार लगाए गए नारे केवल 'वैचारिक विरोध' का हिस्सा थे और उनका उद्देश्य किसी को व्यक्तिगत चोट पहुँचाना नहीं था।

जेएनयू छात्र संघ और प्रशासन का पक्ष

JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य 2020 की कैंपस हिंसा के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करना और जेल में बंद छात्रों के प्रति अपनी वैचारिक एकजुटता प्रदर्शित करना था।

उन्होंने विवादित नारों को विचारधारा की लड़ाई का हिस्सा बताया। दूसरी तरफ, विश्वविद्यालय प्रशासन इस घटना को अनुशासनहीनता के तौर पर देख रहा है। प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि वे वायरल हो रहे वीडियो फुटेज की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि प्रदर्शन में शामिल उन छात्रों की पहचान की जा सके जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है।

पुलिस की कार्रवाई और कैंपस में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने अपनी जांच की गति तेज कर दी है। हालांकि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, उन्हें अभी तक इन नारों के संबंध में कोई औपचारिक या लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन खुफिया एजेंसियां और स्थानीय पुलिस अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही हैं।

फिलहाल जेएनयू प्रशासन ने इस पर कोई आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी नहीं की है, लेकिन कैंपस के मुख्य द्वारों और संवेदनशील हॉस्टलों के बाहर सुरक्षा बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।

प्रशासन और पुलिस की कोशिश है कि कैंपस के भीतर शांति बहाल रहे और किसी भी प्रकार की दोबारा झड़प या अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

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