Manifest Destiny' 2.0: अमेरिकी संसद में ग्रीनलैंड अधिग्रहण बिल पेश, क्या ट्रंप बनाएंगे इसे 51वां राज्य?

यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ग्रीनलैंड का अधिग्रहण करने के लिए "आवश्यक कदम" उठाने का कानूनी अधिकार देने का प्रस्ताव करता है।
नई दिल्ली : अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने आधिकारिक तौर पर अमेरिकी संसद में "ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट" पेश कर दिया है।
यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ग्रीनलैंड का अधिग्रहण करने के लिए "आवश्यक कदम" उठाने का कानूनी अधिकार देने का प्रस्ताव करता है।
यह कदम तब उठाया गया है जब ट्रंप प्रशासन पहले से ही आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड को "राष्ट्रीय सुरक्षा" के लिए अनिवार्य बता रहा है।
बिल की मुख्य बातें: क्या अधिकार मिलेंगे ट्रंप को?
सांसद रैंडी फाइन द्वारा पेश किए गए इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं:-
अधिग्रहण का अधिकार: यह बिल राष्ट्रपति को ग्रीनलैंड को अमेरिकी क्षेत्र के रूप में अधिग्रहित करने के लिए डेनमार्क साम्राज्य के साथ बातचीत करने या "किसी भी आवश्यक साधन" का उपयोग करने का अधिकार देता है।
51वें राज्य का दर्जा: बिल में केवल अधिग्रहण ही नहीं, बल्कि ग्रीनलैंड को पूर्ण अमेरिकी राज्य बनाने का रोडमैप तैयार करने की बात कही गई है, ठीक उसी तरह जैसे अलास्का को शामिल किया गया था।
रिपोर्टिंग: अधिग्रहण के बाद, राष्ट्रपति को कांग्रेस को एक विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी जिसमें यह बताया जाएगा कि ग्रीनलैंड को राज्य के रूप में शामिल करने के लिए संघीय कानूनों में क्या बदलाव आवश्यक हैं।
रणनीतिक अनिवार्यता: रूस और चीन से खतरा
सांसद रैंडी फाइन और ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ग्रीनलैंड केवल एक द्वीप नहीं, बल्कि एक "महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा संपत्ति" है:-
आर्कटिक प्रभुत्व: जो ग्रीनलैंड को नियंत्रित करेगा, वही आर्कटिक शिपिंग लेन पर राज करेगा। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका का मिसाइल डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर आंशिक रूप से ग्रीनलैंड पर निर्भर है।
विदेशी हस्तक्षेप: प्रशासन का दावा है कि ग्रीनलैंड "रूस और चीन के जहाजों से भरा हुआ है," जिसे रोकना अमेरिकी मुख्य भूमि की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
"कैश ऑफर" और सैन्य विकल्प पर चर्चा
गूगल और न्यूज़ रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रहा है:-
वित्तीय प्रस्ताव: रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका ग्रीनलैंड के प्रत्येक निवासी को $10,000 से $100,000 तक का नकद भुगतान करने का ऑफर दे सकता है ताकि वे अमेरिका में शामिल होने का समर्थन करें। कुल सौदा लगभग 5-6 बिलियन डॉलर का हो सकता है।
सैन्य बल: व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की है कि अधिग्रहण के लिए सभी विकल्प खुले हैं। ट्रंप ने स्वयं कहा है कि वे ग्रीनलैंड के लिए "कुछ करेंगे, चाहे वे (डेनमार्क/ग्रीनलैंड) इसे पसंद करें या नहीं।"
वेनेजुएला का उदाहरण: रैंडी फाइन ने इस बिल को पेश करते समय वेनेजुएला में हालिया अमेरिकी हस्तक्षेप और निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए इसे अमेरिकी "शक्ति और नेतृत्व" का प्रदर्शन बताया।
डेनमार्क और ग्रीनलैंड की तीखी प्रतिक्रिया
इस बिल और ट्रंप के बयानों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ा विरोध हो रहा है:-
"बिक्री के लिए नहीं": ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है, "हम अमेरिकी नहीं बनना चाहते, हम डेन नहीं बनना चाहते, हम ग्रीनलैंडर बने रहना चाहते हैं।"
नाटो में दरार: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का सैन्य दबाव या अधिग्रहण की कोशिश नाटो के अंत की शुरुआत हो सकती है।
जनता का रुख: 2025 के एक पोल के अनुसार, ग्रीनलैंड की 85% आबादी अमेरिका में शामिल होने के विचार को सिरे से खारिज करती है।
आगे की राह और चुनौतियां
हालांकि बिल पेश हो गया है, लेकिन इसके कानून बनने की राह आसान नहीं है:-
संसद में विरोध: कई डेमोक्रेटिक और कुछ रिपब्लिकन सांसद भी एक सहयोगी नाटो देश की संप्रभुता के उल्लंघन के खिलाफ हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून: बिना सहमति के किसी क्षेत्र का अधिग्रहण अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन माना जाएगा।
समय सीमा: डेनमार्क और ग्रीनलैंड की रणनीति इस मुद्दे को नवंबर 2026 के अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव तक खींचने की है, ताकि राजनीतिक प्राथमिकताएं बदल सकें।
