‘Four Stars of Destiny’: जनरल नरवणे की किताब में ऐसा क्या है, जो अब तक प्रकाशित नहीं हुआ?

जनरल नरवणे की किताब पर संसद में बवाल, राहुल गांधी ने सरकार पर उठाए सवाल।
General MM Naravane Book Controversy: बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में उस वक्त तीखी बहस देखने को मिली, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब Four Stars of Destiny का जिक्र किया। राहुल गांधी ने एक मैगजीन में छपे कथित लीक अंशों का हवाला देते हुए सरकार को घेरा, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया।
चीन सीमा विवाद का संदर्भ बना विवाद की जड़
राहुल गांधी ने अपने भाषण में किताब के उस हिस्से का उल्लेख किया, जिसमें भारत-चीन सीमा तनाव के दौरान की स्थिति का जिक्र बताया गया है। उनका मकसद कांग्रेस की देशभक्ति पर उठ रहे सवालों का जवाब देना था, लेकिन इस संदर्भ ने सदन में हंगामे की स्थिति पैदा कर दी।
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किताब पर बैन नहीं, लेकिन प्रकाशन क्यों रुका?
हालांकि Four Stars of Destiny पर किसी अदालत ने प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन सरकार की ओर से इसके प्रकाशन को फिलहाल रोक दिया गया है। 2024 की शुरुआत में किताब के प्रस्तावित रिलीज से ठीक पहले रक्षा मंत्रालय और भारतीय सेना ने इसकी समीक्षा का फैसला लिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जताई गई आपत्ति
रिपोर्ट्स के मुताबिक, किताब में राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य प्रक्रियाओं से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों का जिक्र होने की आशंका जताई गई। खास तौर पर 2020 के सीमा विवाद के दौरान रेचिन ला में भारतीय और चीनी टैंकों के आमने-सामने आने की घटना का विवरण चर्चा में है, जिसे सैन्य परंपराओं के लिहाज से असामान्य माना गया।
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अग्निपथ योजना पर खुलासों से भी बढ़ी चिंता
किताब के लीक अंशों में जनरल नरवणे द्वारा अग्निपथ भर्ती योजना को लेकर किए गए खुलासे भी सरकार के लिए असहज करने वाले बताए जा रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि इस योजना ने नौसेना और वायुसेना को पूरी तरह चौंका दिया था। साथ ही, सेना की ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ योजना को सीमित प्रयोग के तौर पर देखने की बात भी सामने आई।
किस नियम के तहत रोकी गई किताब?
सरकार ने Central Civil Services (Pension) Amendment Rules, 2021 का हवाला दिया है। इन नियमों के अनुसार, सेवानिवृत्त सैन्य और सुरक्षा अधिकारी बिना पूर्व अनुमति अपने कार्यकाल से जुड़ी सामग्री प्रकाशित नहीं कर सकते। बताया गया कि जनरल नरवणे ने पब्लिशर तक पांडुलिपि पहुंचने से पहले ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ नहीं लिया था।
जनरल नरवणे की प्रतिक्रिया भी आई सामने
किताब की समीक्षा में देरी को लेकर जनरल नरवणे ने पिछले साल हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था कि उनकी किताब पुरानी शराब की तरह परिपक्व हो रही है, जितनी देर लगेगी, उतनी ही कीमती बनती जाएगी। अक्टूबर में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किताब लिखना उनका काम था, जबकि जरूरी अनुमति लेना पब्लिशर की जिम्मेदारी है।
