कॉन्फिडेंट ग्रुप के चेयरमैन डॉ. रॉय सी.जे. ने की खुदकुशी: IT रेड के बीच हुई घटना, भाई ने केंद्रीय एजेंसी की पूछताछ पर उठाए गंभीर सवाल

डॉ. रॉय सी.जे. देश के सबसे बड़े कार गैरेज वाले लोगों में शामिल थे और उनके पास 200 से ज्यादा लग्जरी कारों का कलेक्शन था।
कोच्चि: कॉन्फिडेंट ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन डॉ. रॉय सी.जे. ने अपने आवास पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। यह दुखद घटना उस समय हुई जब केरल आयकर विभाग की टीम पिछले तीन दिनों से उनके दफ्तर में लगातार कार्रवाई और पूछताछ कर रही थी।
लगभग 9,000 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक डॉ. रॉय की मौत की खबर से व्यापारिक जगत और फिल्म जगत में शोक की लहर है। उनके परिवार में पत्नी लिनी रॉय, बेटा रोहित और बेटी रिया हैं।
तीन दिनों की पूछताछ और केंद्रीय एजेंसी पर दबाव के आरोप
डॉ. रॉय के बड़े भाई ने इस घटना के लिए केंद्रीय एजेंसी के दबाव को जिम्मेदार ठहराया है। उनके अनुसार, केरल से आयकर विभाग की टीम पहली बार 3 दिसंबर 2025 को आई थी और कुछ दिन बेंगलुरु में रुकी थी।
इसके बाद 28 जनवरी को दोबारा कार्रवाई शुरू हुई और डॉ. रॉय को विशेष रूप से दुबई से बुलाया गया था। भाई का सवाल है कि आयकर अफसरों की पूछताछ के दौरान ऐसा क्या हुआ कि डॉ. रॉय जैसा व्यक्ति, जिस पर कोई कर्ज नहीं था, उसे ऐसा बड़ा कदम उठाना पड़ा।
अपमान से उपजा संकल्प: जब 13 साल की उम्र में शोरूम से भगाए गए
डॉ. रॉय की सफलता के पीछे बचपन के अपमान की एक बड़ी कहानी थी। जब वे 13 साल के थे, तब बेंगलुरु के एक शोरूम में 'डॉल्फिन' कार देखने गए थे। वहां सेल्समैन ने यह कहकर उन्हें भगा दिया था कि "तू क्या कार खरीदेगा, चल निकल!"। उसी दिन उन्होंने ठान लिया था कि वे दुनिया की सबसे महंगी कारें खरीदेंगे।
इसी जुनून के चलते उन्होंने करियर की शुरुआत हेवलेट-पैकार्ड (HP) कंपनी में काम करके की और बाद में अपना विशाल व्यापारिक साम्राज्य खड़ा किया।
बिना कर्ज के 36 की उम्र में खरीदा प्राइवेट जेट और लग्जरी कारों का शौक
डॉ. रॉय ने अपनी मेहनत के दम पर 36 साल की उम्र में अपना पहला प्राइवेट जेट खरीदा था, वह भी बैंक से एक रुपया उधार लिए बिना। वे देश के सबसे बड़े कार गैरेज वाले लोगों में शामिल थे और उनके पास 200 से ज्यादा लग्जरी कारों का कलेक्शन था।
उनके बेड़े में बुगाटी वेरॉन, फेरारी, कोएनिगसेग अगेरा, मैकलारेन, और लैम्बोर्गिनी हुराकैन जैसी गाड़ियाँ शामिल थीं। उन्होंने अपनी 12वीं रोल्स रॉयस फैंटम 8 दिसंबर 2025 को खरीदी थी।
पहली मारुति 800 की तलाश और 10 लाख का इनाम
डॉ. रॉय अपनी जड़ों से जुड़े हुए थे। उन्होंने 1994 में अपनी पहली कार मारुति 800 महज 1.10 लाख रुपये में खरीदी थी और 1997 में इसे बेच दिया था। 31 साल बाद 2025 में जब उन्हें अपनी पहली उपलब्धि याद आई, तो उन्होंने उस कार को खोजने वाले के लिए 10 लाख रुपये इनाम देने का ऐलान किया था।
दोस्तों की मदद से वह कार मिली तो उन्होंने उसे वापस खरीद लिया। वे अक्सर कहते थे कि 1994 में उस कार की कीमत में 2 एकड़ जमीन आती थी, जिसकी आज की वैल्यू 20 करोड़ से ज्यादा है।
रियल एस्टेट के साथ फिल्म जगत में भी था बड़ा नाम
डॉ. रॉय का कॉन्फिडेंट ग्रुप केवल रियल एस्टेट तक सीमित नहीं था। उन्होंने फिल्म निर्माण में भी अपनी पहचान बनाई थी और 4 मलयालम फिल्मों का प्रोडक्शन किया था। वे खेल आयोजनों को प्रायोजित करने के लिए भी जाने जाते थे।
उनका मानना था कि असली दौलत जमीन है और कारें तो सिर्फ उनका शौक हैं। इतने सफल और आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति द्वारा की गई इस खुदकुशी ने आयकर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
