'कोरियन लवर' का खूनी कोड: मौत के 50 टास्क का काला कच्चा चिट्ठा, जिसे खेलकर हंसते-हंसते मर जाते हैं बच्चे!

यह कोई साधारण वीडियो गेम नहीं है, बल्कि एक 'सायकोलॉजिकल ट्रैप' इसे डार्क वेब के जरिए फैलाया जाता है।
गाजियाबाद: गाजियाबाद की 'भारत सिटी' सोसाइटी में तीन सगी बहनों की सामूहिक आत्महत्या ने डिजिटल दुनिया के एक बेहद काले और जानलेवा चेहरे को उजागर किया है।
16 साल की निशिका, 14 साल की प्राची और 12 साल की पाखी ने मिलकर 9वीं मंजिल से मौत की छलांग लगा दी।
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस खौफनाक कदम के पीछे 'कोरियन लवर' नाम का एक टास्क-बेस्ड गेम था, जिसमें मंझली बहन प्राची को 'डेथ कमांडर' का दर्जा मिला था।
'कोरियन लवर' गेम का रहस्य: आखिर क्या है यह बला?
यह कोई साधारण वीडियो गेम नहीं है, बल्कि एक 'सायकोलॉजिकल ट्रैप' है। इसे डार्क वेब और गुप्त सोशल मीडिया ग्रुप्स के जरिए फैलाया जाता है।
यह गेम उन किशोरों को अपना शिकार बनाता है जो 'कोरियन संस्कृति' (K-Drama और K-Pop) की ओर आकर्षित हैं।
इसमें एक 'वर्चुअल एडमिन' होता है जो खुद को एक खूबसूरत कोरियन प्रेमी के रूप में पेश करता है और बच्चों को अपनी बातों में फंसाकर उन्हें परिवार से काट देता है।
मौत की सीढ़ी: क्या होते हैं इसके 50 टास्क?
इस गेम में खिलाड़ी को 50 दिनों तक 50 अलग-अलग टास्क दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया इतनी धीमी और सम्मोहक होती है कि बच्चे को पता भी नहीं चलता कि वह कब मौत की ओर बढ़ रहा है।
टास्क 1-10 (आइसोलेशन): रात के 3 बजे उठकर डरावने कोरियन वीडियो देखना, दिन भर किसी से बात न करना।
टास्क 11-30 (सेल्फ-हार्म): शरीर पर ब्लेड से खास निशान (कोड) बनाना, हाथ की नसें कुरेदना और उसकी फोटो एडमिन को भेजना।
टास्क 31-45 (डर पर जीत): ऊंची इमारतों की छत पर खड़े होकर सेल्फी लेना, रेल की पटरियों पर चलना।
टास्क 46-49 (कमांडर लेवल): अपनी पहचान गुप्त रखना और अपने साथ अन्य लोगों को इस खेल में जोड़ना। गाजियाबाद की प्राची इसी लेवल पर थी।
टास्क 50 (द फाइनल एग्जिट): इस टास्क का नाम 'अनंत मिलन' या 'परम शांति' रखा जाता है, जिसका अर्थ होता है—आत्महत्या।
मौत का तांडव: अब तक कितनी गई जान?
सरकारी आंकड़े और स्वतंत्र रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में ऑनलाइन गेमिंग के चलते मौतों का ग्राफ डराने वाला है:-
पिछले 4 वर्षों में भारत में लगभग 35 से 40 किशोरों की मौत सीधे तौर पर टास्क-बेस्ड सुसाइड गेम्स के कारण दर्ज की गई है।
एक स्टडी के अनुसार, लगभग 16.37% किशोरों के मन में इंटरनेट गेमिंग की लत के कारण आत्महत्या के विचार आते हैं।
सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से सामने आए हैं।
लगभग 15 लाख बच्चे भारत में 'इंटरनेट गेमिंग डिसऑर्डर' के शिकार हैं, जिनमें सुसाइडल टेंडेंसी देखी गई है।
भारत सरकार का 'सर्जिकल स्ट्राइक': इन जानलेवा गेम्स पर लगा है कड़ा प्रतिबंध
बच्चों की मानसिक सुरक्षा और सुरक्षा कारणों को देखते हुए भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अब तक कई खतरनाक प्लेटफॉर्म्स को प्रतिबंधित किया है:-
ब्लू व्हेल चैलेंज (Blue Whale): यह भारत में प्रतिबंधित होने वाला पहला प्रमुख सुसाइडल गेम था। इसमें भी 50 टास्क होते थे और आखिरी टास्क आत्महत्या था। 2017 में इसे पूरी तरह बैन कर दिया गया।
मोमो चैलेंज (Momo Challenge): व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाले इस डरावने 'मोमो' अवतार वाले गेम को उकसाने और डराने के आरोप में 2018 में प्रतिबंधित किया गया था।
PUBG (Original) और Free Fire: इन गेम्स को अत्यधिक हिंसा, लत और डेटा सुरक्षा के मुद्दों के कारण प्रतिबंधित किया गया। सरकार ने माना कि ये गेम बच्चों के व्यवहार में चिड़चिड़ापन और हिंसक प्रवृति पैदा कर रहे थे।
ऑनलाइन बेटिंग और सट्टेबाजी ऐप्स: साल 2025 और 2026 की शुरुआत में सरकार ने 'महादेव बुक', '1XBET' और 'परिमैच' जैसे 170 से अधिक सट्टेबाजी ऐप्स को बैन किया है, क्योंकि इनकी वजह से कई युवाओं ने कर्ज में डूबकर खुदकुशी की थी।
कैसे बनी प्राची 'डेथ कमांडर'?
गाजियाबाद पुलिस की थ्योरी के अनुसार, प्राची इस गेम के 45वें टास्क को पार कर चुकी थी। इस लेवल पर उसे 'कमांडर' का बैच मिला था।
कमांडर का काम होता है 'रिक्रूटमेंट' करना। प्राची ने अपनी दोनों बहनों को इस काल्पनिक दुनिया का हिस्सा बनाया और उन्हें यकीन दिलाया कि अगर वे तीनों एक साथ छलांग लगाती हैं, तो उनका 'कोरियन लवर' उन्हें दूसरी दुनिया में मिलेगा।
