बजट 2026 | उम्मीदें: सोना-चांदी की कीमतें होंगी कम, इम्पोर्ट ड्यूटी को 6% से घटाकर 4% करने की तैयारी में सरकार

2025 में चांदी की कीमतों में 167% और सोने में 75% की भारी तेजी के बाद, इस कटौती से आम जनता को बड़ी राहत मिलने के आसार हैं।
नई दिल्ली: बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणाओं पर सर्राफा बाजार की निगाहें टिकी हुई हैं। उद्योग जगत और विशेषज्ञों का अनुमान है कि सरकार सोने और चांदी पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी को 6% से घटाकर 4% कर सकती है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाना और तस्करी को रोकना है। यदि यह फैसला लागू होता है, तो शादी-ब्याह के सीजन में जेवर खरीदना आम आदमी के लिए काफी किफायती हो जाएगा।
पिछले एक साल में रिकॉर्ड उछाल: चांदी 167% और सोना 75% चढ़ा
साल 2025 कीमती धातुओं के निवेशकों के लिए ऐतिहासिक रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में चांदी की कीमतों में 167% और सोने की कीमतों में 75% की अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी की मांग बढ़ी है।
कीमतों में इस भारी उछाल के कारण आम उपभोक्ताओं की पहुंच से ये धातुएं दूर होती जा रही थीं, जिसे देखते हुए ड्यूटी में कटौती की मांग तेज हो गई है।
तस्करी पर लगाम और ज्वेलरी सेक्टर को बढ़ावा
भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। जब इम्पोर्ट ड्यूटी अधिक होती है, तो अवैध रास्ते से सोने की तस्करी बढ़ जाती है। सर्राफा विशेषज्ञों का मानना है कि ड्यूटी को 4% तक लाने से वैध व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और सरकार के राजस्व में भी सुधार होगा।
इसके अलावा, इससे भारत के जेम्स और ज्वेलरी एक्सपोर्ट सेक्टर को भी वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी, जिससे हजारों नए रोजगार सृजित हो सकते हैं।
क्या होगा आम आदमी की जेब पर असर?
अगर वित्त मंत्री ड्यूटी में 2% की कटौती करती हैं, तो प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत में लगभग 1,500 से 2,000 रुपये की कमी आ सकती है। इसी तरह चांदी के दाम भी प्रति किलो 3,000 से 4,000 रुपये तक गिर सकते हैं।
यह गिरावट उन परिवारों के लिए बड़ी राहत होगी जो आगामी महीनों में विवाह समारोहों के लिए गहनों की खरीदारी की योजना बना रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बजट में ड्यूटी घटने की खबर से उन निवेशकों में हलचल है जिन्होंने ऊंचे दामों पर सोना-चांदी खरीदा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ड्यूटी घटने से घरेलू बाजार में कीमतों में अल्पकालिक सुधार देखने को मिल सकता है।
हालांकि, लंबी अवधि में अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियां और डॉलर की मजबूती ही कीमतों की दिशा तय करेंगी।
