कहीं जम गई झीलें, कहीं बरसेगी आफत: कश्मीर में 'चिल्ला-ए-कलां तो दक्षिण में बारिश! IMD ने दी बड़ी चेतावनी

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक मौसम के मिजाज में बड़े बदलाव दर्ज किए जा रहे हैं।
नई दिल्ली: भारत के मौसम चक्र में इस समय दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। जहां उत्तर और मध्य भारत भीषण ठंड, घने कोहरे और 'चिल्ला-ए-कलां' की मार झेल रहा है, वहीं दक्षिण भारत के राज्यों पर बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव का खतरा मंडरा रहा है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी की है कि आने वाले कुछ दिन देश के कई हिस्सों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं।
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक मौसम के मिजाज में बड़े बदलाव दर्ज किए जा रहे हैं।
कश्मीर में 'चिल्ला-ए-कलां' का सितम और जमी हुई डल झील
कश्मीर घाटी इस समय 40 दिनों की सबसे भीषण ठंड की अवधि 'चिल्ला-ए-कलां' की चपेट में है। श्रीनगर में इस सीजन की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई है, जिससे प्रसिद्ध डल झील के कई हिस्से पूरी तरह जम गए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, घाटी में 10 जनवरी तक तापमान में भारी गिरावट जारी रहेगी, हालांकि इसके बाद 1 से 2 डिग्री की मामूली बढ़त की संभावना है। 21 जनवरी तक आसमान में बादल छाए रहेंगे।
क्या है 'चिल्ला-ए-कलां' और इसकी अवधि
फारसी भाषा में 'चिल्ला' का अर्थ होता है 40 दिन और 'कलां' का अर्थ होता है बड़ा। यानी 'बड़ी ठंड के 40 दिन'। कश्मीर में हर साल यह दौर 21 दिसंबर से शुरू होता है और 30 जनवरी तक चलता है। यह साल का वह समय होता है जब कश्मीर में सर्दी अपने चरम पर होती है। इस साल यह 29 जनवरी 2026 को समाप्त होगा।
हड्डियों को जमा देने वाली ठंड का असर
इन 40 दिनों के दौरान कश्मीर घाटी में बर्फबारी की संभावना सबसे अधिक होती है। तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे -5°C से -10°C या उससे भी कम चला जाता है। इसी दौरान पानी के पाइप जम जाते हैं, डल झील बर्फ की चादर में तब्दील हो जाती है और झरने भी जम जाते हैं। इस समय चलने वाली बर्फीली हवाएं हड्डियों तक को कंपा देने वाली होती हैं।
कश्मीरी जनजीवन और 'चिल्ला-ए-कलां' की तैयारी
कश्मीर के लोग इस दौर के लिए महीनों पहले से तैयारी करते हैं। वे खाने-पीने की चीजों और कोयले का स्टॉक कर लेते हैं। ठंड से बचने के लिए पारंपरिक 'फेरन' पहना जाता है और खुद को गर्म रखने के लिए 'कांगड़ी' मिट्टी के बर्तन में दहकते कोयले का इस्तेमाल किया जाता है। इस दौरान प्रसिद्ध 'नुन चाय' का सेवन भी काफी बढ़ जाता है।
चिल्ला-ए-कलां के बाद 'चिल्ला-ए-खुर्द' और 'चिल्ला-ए-बच्चा'
40 दिनों के 'चिल्ला-ए-कलां' के खत्म होने के बाद ठंड पूरी तरह खत्म नहीं होती, बल्कि इसके दो और चरण होते हैं:-
चिल्ला-ए-खुर्द (Chilla-i-Khurd):
यह 20 दिनों की अवधि होती है (31 जनवरी से 19 फरवरी), जिसे 'छोटा चिल्ला' कहा जाता है। इसमें ठंड थोड़ी कम होने लगती है।
चिल्ला-ए-बच्चा (Chilla-i-Bachha) :
यह आखिरी 10 दिनों की अवधि होती है (20 फरवरी से मार्च की शुरुआत तक), जिसे 'बच्चा चिल्ला' कहते हैं। इसके बाद कश्मीर में वसंत का आगमन होने लगता है।
कश्मीर के इतिहास और संस्कृति में 'चिल्ला-ए-कलां' का बहुत महत्व है, क्योंकि इसी दौरान होने वाली भारी बर्फबारी घाटी के ग्लेशियरों को रिचार्ज करती है, जिससे पूरे साल पानी की आपूर्ति बनी रहती है।
दिल्ली-NCR में रिकॉर्ड तोड़ ठंड और शीतलहर का कहर
देश की राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में शुक्रवार को इस सीजन की सबसे ठंडी सुबह दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक दिल्ली सहित उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में शीतलहर की स्थिति बने रहने का अनुमान जताया है। कोहरे के कारण दृश्यता कम होने से यातायात पर भी बुरा असर पड़ा है, हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी ने कनकनी और बढ़ा दी है।
दक्षिण भारत के 4 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी
एक तरफ उत्तर भारत जम रहा है, तो दूसरी तरफ दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने गहरे अवदाब के कारण भारी बारिश का संकट खड़ा हो गया है।
IMD ने अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के कई हिस्सों में 9, 10 और 11 जनवरी को भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे बंगाल की खाड़ी और आसपास के समुद्र क्षेत्रों में न जाएं।
उत्तर प्रदेश और बिहार में कोहरे और शीत दिवस का अलर्ट
बिहार में अगले कुछ दिनों तक शीतलहर और घने कोहरे का कहर जारी रहने वाला है। 10 और 11 जनवरी को बिहार के कुछ हिस्सों में 'शीत दिवस' जैसी स्थिति रहने की संभावना है, जिससे दिन के तापमान में सामान्य से अधिक गिरावट आ सकती है।
वहीं, उत्तर प्रदेश के लोगों को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले दो दिनों में थोड़ी राहत मिल सकती है। धूप निकलने से कोहरे में कमी आएगी, हालांकि लखनऊ और आसपास के इलाकों में सुबह के समय धुंध बनी रहेगी।
मध्य और राजस्थान सहित इन राज्यों में शीतलहर का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, ओड़िशा और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 10-11 जनवरी के दौरान कड़ाके की ठंड पड़ेगी।
इसके अलावा उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में भी शीतलहर का असर दिखेगा। राजस्थान में विशेष रूप से 11 से 14 जनवरी के दौरान भीषण शीतलहर चलने की प्रबल संभावना जताई गई है।
प्रमुख शहरों का आज का संभावित तापमान
देश के विभिन्न शहरों में ठंड का असर उनके न्यूनतम तापमान से साफ देखा जा सकता है। शिमला और नैनीताल जैसे पहाड़ी इलाकों में पारा 1°C से 2°C तक लुढ़क गया है, जबकि मैदानी इलाकों में दिल्ली (6°C), जयपुर (8°C) और लखनऊ (9°C) में भी रातें काफी सर्द हो गई हैं। कोलकाता और मुंबई जैसे तटीय शहरों में भी तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।
