ठाकरे-पवार के वर्चस्व का सूर्यास्त: महाराष्ट्र की राजनीति के नए 'चाणक्य' बने देवेंद्र फडणवीस

इस जीत के साथ महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा पूरी तरह बदल गई है।
मुंबई : महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए इतिहास रच दिया है।
देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में बीजेपी ने न केवल मुंबई का 'किला' फतह किया, बल्कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में भी शरद पवार और अजित पवार की 'पॉवर' को करारी शिकस्त दी है।
इस जीत के साथ ही देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र की सियासत के सबसे बड़े 'धुरंधर' बनकर उभरे हैं, जिन्होंने दशकों पुराने क्षेत्रीय वर्चस्व को खत्म कर दिया है।
मुंबई में ठाकरे ब्रदर्स का वर्चस्व खत्म, बीजेपी का कब्जा
मुंबई महानगर पालिका के चुनाव परिणामों ने राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंका दिया है। दशकों से बीएमसी की सत्ता पर काबिज ठाकरे परिवार को अपने ही गढ़ में हार का सामना करना पड़ा है।
देवेंद्र फडणवीस की सटीक रणनीति की बदौलत बीजेपी ने ठाकरे भाइयों के प्रभाव को दरकिनार करते हुए मुंबई में बहुमत हासिल किया है।
इस जीत को बीजेपी के लिए 'महाविजय' माना जा रहा है, क्योंकि बीएमसी पर नियंत्रण को महाराष्ट्र की सत्ता का मुख्य द्वार माना जाता है।
पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में पवार की ताकत को दी मात
मुंबई के साथ-साथ बीजेपी ने पश्चिमी महाराष्ट्र में पवार परिवार के वर्चस्व को भी तगड़ी चोट पहुंचाई है। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम, जिसे शरद पवार और अजित पवार का अभेद्य दुर्ग माना जाता था, वहां बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की है।
पवार परिवार की 'पॉवर' को उनके ही इलाके में मात देना बीजेपी की जमीनी स्तर पर बढ़ती पकड़ और फडणवीस की व्यूह रचना की बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
देवेंद्र फडणवीस की रणनीति और बीजेपी का बढ़ता कद
इन चुनावी नतीजों ने देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र बीजेपी के निर्विवाद नेता और राज्य की राजनीति के 'किंगमेकर' के रूप में स्थापित कर दिया है। फडणवीस ने जिस तरह से मुंबई से लेकर पुणे तक विपक्षी दलों के मजबूत किलों को भेदा, उसने बीजेपी कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है।
इस जीत ने साफ कर दिया है कि राज्य की जनता अब विकास के एजेंडे पर बीजेपी की ओर देख रही है, जिससे आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बीजेपी की राह और भी मजबूत हो गई है।
विपक्षी एकजुटता और स्थानीय समीकरण हुए ध्वस्त
निकाय चुनावों के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपक्षी दलों के गठबंधन और उनके स्थानीय समीकरण बीजेपी की लहर के सामने टिक नहीं पाए।
जहां विपक्षी दल अपनी पारंपरिक सीटों को बचाने में जुटे थे, वहीं फडणवीस की योजना ने उनके वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है।
खासकर युवा और शहरी मतदाताओं ने पुराने क्षेत्रीय मोह को छोड़कर बीजेपी के विकास मॉडल पर मुहर लगाई है, जिससे विरोधियों के लिए भविष्य की राह और कठिन हो गई है।
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बदली राज्य की तस्वीर
इस जीत के साथ महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा पूरी तरह बदल गई है। बीजेपी ने न केवल नगर निगमों पर कब्जा किया है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भी अपनी मजबूत मनोवैज्ञानिक बढ़त बना ली है।
अब राज्य में किसी भी बड़े गठबंधन या सत्ता संघर्ष के केंद्र में देवेंद्र फडणवीस की भूमिका निर्णायक रहेगी। यह परिणाम इस बात का संकेत है कि महाराष्ट्र की जनता अब क्षेत्रीय दलों के बजाय एक स्थिर और मजबूत राष्ट्रीय विकल्प को प्राथमिकता दे रही है।
