बजट सत्र- दूसरा दिन: संसद में कागज फेंके गए, आसन का अपमान! नरवणे की किताब पर फिर बवाल; 8 सांसद निलंबित

सरकार ने स्पष्ट किया कि आसन का अपमान स्वीकार्य नहीं है और यह कार्रवाई सदन की गरिमा बहाल करने के लिए जरूरी थी।
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के पांचवें दिन लोकसभा में उस समय अभूतपूर्व हालात बन गए, जब विपक्षी सांसदों के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। विवाद पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा और India-US Trade Deal को लेकर हुआ, जो देखते ही देखते आसन के अपमान और निलंबन की कार्रवाई तक पहुंच गया।
हंगामे के दौरान कुछ सांसदों द्वारा कागज फाड़कर आसन की ओर उछाले जाने को सदन की अवमानना माना गया। इसके बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 8 विपक्षी सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘Four Stars of Destiny’ का जिक्र किया।
राहुल गांधी ने दावा किया कि इस किताब में गलवान संघर्ष को लेकर सरकार की विफलताओं का उल्लेख है। सत्ता पक्ष ने तुरंत आपत्ति जताते हुए कहा कि जो किताब अभी आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है, उसे सदन में उद्धृत नहीं किया जा सकता। इसके लिए नियम 352 का हवाला दिया गया।
टोकाटाकी से हंगामे तक
स्पीकर द्वारा नियमों का पालन करने की हिदायत दिए जाने के बाद विपक्षी सांसद वेल में आ गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
इसी दौरान कुछ सांसद महासचिव की मेज के पास पहुंचे, सरकारी दस्तावेजों की प्रतियां फाड़ीं और उन्हें स्पीकर की चेयर की ओर उछाल दिया। इस घटनाक्रम ने सदन की गरिमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

सरकार का आरोप: “संसदीय मर्यादा तोड़ी गई”
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस आचरण को “संसदीय लोकतंत्र के इतिहास का काला दिन” बताया। उन्होंने कहा कि कुछ सांसद जनरल सेक्रेटरी की टेबल तक चढ़ गए, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
नियम 374(2) के तहत निलंबन
दोपहर 3 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने हंगामे में शामिल 8 सांसदों को नामजद किया।
इसके बाद सरकार ने नियम 374(2) के तहत इन सदस्यों को मौजूदा सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे सदन ने ध्वनि मत से पारित कर दिया। इसके साथ ही लोकसभा की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
#WATCH | Delhi: Union Minister Kiren Rijiju says, "I have just told the leaders of Congress that LoP Rahul Gandhi can continue his speech. However, what the former army chief did not say, what is not true, and what is not permitted under the rules should not be forced upon the… pic.twitter.com/svTN5g4oF0
— ANI (@ANI) February 3, 2026
निलंबित किए गए 8 सांसद कौन हैं?
निलंबन की कार्रवाई की जद में आए सांसदों के नाम इस प्रकार हैं-
- मणिक्कम टैगोर (कांग्रेस)
- अमरिंदर सिंह राजा वडिंग (कांग्रेस)
- गुरजीत सिंह औजला (कांग्रेस)
- हिबी ईडन (कांग्रेस)
- डीन कुरियाकोस (कांग्रेस)
- किरण कुमार रेड्डी (कांग्रेस)
- प्रशांत पडोले (कांग्रेस)
- एस. वेंकटेशन (सीपीएम, मदुरै)
मकर द्वार पर विपक्ष का प्रदर्शन
निलंबन की कार्रवाई के तुरंत बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर धरना दिया।
प्रियंका गांधी ने इस कदम को “लोकतंत्र की हत्या” बताया, जबकि राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और India-US Trade Deal जैसे गंभीर मुद्दे उठाने पर उनकी आवाज दबाई गई। विपक्ष का यह भी दावा रहा कि बहस के दौरान राहुल गांधी का माइक बंद कर दिया गया था।
#WATCH | Delhi: Congress MPs, including Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, Priyanka Gandhi Vadra and other MPs protest at Makar Dwar of the Parliament, against the suspension of 8 MPs from Lok Sabha and against the India-US trade agreement.
— ANI (@ANI) February 3, 2026
The suspended MPs include Hibi Eden,… pic.twitter.com/iXQx8SAP5Q
#WATCH | Delhi | LoP, Lok Sabha, Rahul Gandhi says, "Modi ji is rattled. The (US-India) trade deal, which was stalled for the past few months, was signed by Narendra Modi last night. There is extreme pressure on him. Narendra Modi ji's image can get damaged. The main thing is… pic.twitter.com/0z6fLFGV0p
— ANI (@ANI) February 3, 2026
सरकार का पलटवार
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कुछ लोग यह मान बैठे हैं कि देश पर सिर्फ गांधी परिवार का ही राज हो सकता है।
उन्होंने कहा कि संसद नियमों से चलेगी, गुंडागर्दी से नहीं। सरकार ने साफ किया कि आसन का अपमान किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और निलंबन की कार्रवाई सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए जरूरी थी।
