विधायक बनेंगे 'विधायी एक्सपर्ट': जम्मू-कश्मीर भाजपा की कार्यशाला, सदन की मर्यादा और आक्रामक रणनीति पर खास फोकस

जम्मू-कश्मीर भाजपा की कार्यशाला, सदन की मर्यादा और आक्रामक रणनीति पर खास फोकस
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कार्यशाला में जनहित के मुद्दों, विधायी प्रक्रियाओं और सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा हुई।

पार्टी का लक्ष्य सदन में एकजुट और आक्रामक विपक्ष की भूमिका निभाते हुए जम्मू संभाग की समस्याओं को प्रमुखता से उठाना है।
जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा के आगामी सत्र से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने विधायकों की एक विशेष दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया है।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य न केवल विधानसभा के भीतर विपक्ष को मजबूती से जवाब देना है, बल्कि जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों को प्रभावी ढंग से सदन के पटल पर रखना भी है।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि एक मजबूत विपक्ष के रूप में भाजपा की भूमिका राज्य के विकास और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए विधायकों को विधायी प्रक्रियाओं और जनहित के विषयों पर प्रशिक्षित करना आवश्यक है।
​कार्यशाला का आयोजन और शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी
​जम्मू के एक स्थानीय होटल में आयोजित इस कार्यशाला में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महासचिव और कई वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे हैं। इस दौरान दिल्ली से आए केंद्रीय नेता और विधायी मामलों के विशेषज्ञ भी विधायकों को मार्गदर्शन देंगे।
कार्यशाला का मुख्य केंद्र बिंदु यह है कि किस तरह सदन की मर्यादा के भीतर रहकर सरकार की कमियों को उजागर किया जाए और जनता की आवाज को मजबूती प्रदान की जाए।
​जनता के ज्वलंत मुद्दों को उठाने की तैयारी
​भाजपा विधायकों ने इस कार्यशाला में उन प्रमुख मुद्दों की सूची तैयार की है, जिन पर सरकार को घेरा जा सकता है। इनमें विकास कार्यों की गति, स्थानीय युवाओं को रोजगार, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं (बिजली, पानी, सड़क) से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।
विधायकों को सिखाया जा रहा है कि कैसे शून्यकाल और प्रश्नकाल के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को आधिकारिक रूप से दर्ज कराना है ताकि उन पर सरकार की जवाबदेही तय हो सके।
​विधायी नियमों और संसदीय मर्यादा का प्रशिक्षण
​कार्यशाला के एक महत्वपूर्ण सत्र में नवनिर्वाचित और अनुभवी विधायकों को विधानसभा के नियमों, प्रक्रियाओं और संसदीय आचरण के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सदन के भीतर भाजपा का कोई भी विधायक तकनीकी खामी के कारण अपनी बात रखने से वंचित न रहे।
विधायकों को संसदीय शब्दावली और प्रस्ताव पेश करने के तरीकों के बारे में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
​संगठनात्मक एकता और आक्रामक विपक्ष की भूमिका
​पार्टी नेतृत्व ने विधायकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि विधानसभा के भीतर सभी विधायकों को एकजुट होकर एक स्वर में बात करनी होगी।
मुख्यमंत्री और सत्ता पक्ष के दावों को तथ्यों के साथ चुनौती देने के लिए एक विशेष 'रिसर्च टीम' भी गठित की जा रही है, जो विधायकों को डेटा और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएगी। भाजपा का लक्ष्य सदन में खुद को एक अनुशासित लेकिन बेहद आक्रामक विपक्ष के रूप में स्थापित करना है।
​क्षेत्रीय असंतुलन और भेदभाव पर रहेगा फोकस
​भाजपा इस सत्र में जम्मू संभाग के साथ होने वाले कथित भेदभाव और क्षेत्रीय असंतुलन के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाने वाली है। कार्यशाला में चर्चा की गई कि कैसे सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और वहां के निवासियों की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाए।
इसके अलावा, राज्य के पुनर्गठन के बाद हुए विकास कार्यों और केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग को लेकर भी विधायक सदन में अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
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