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छोरियां छोरों से कम नहीं : एमएससी कर रही सुष्मिता ने थामा रोडवेज बस का स्टेयरिंग, पुलिस का पेपर भी पास किया

झज्जर के गांव खातीवास की बेटी सुष्मिता कहती हैं कि पता नहीं जीवन में कब उतार चढ़ाव आ जाए, ऐसे में प्रत्येक परिस्थिति चाहे अच्छी हो या बुरी, सबके लिए तैयार होना जरूरी है।

छोरियां छोरों से कम नहीं : एमएससी कर रही सुष्मिता ने थामा रोडवेज बस का स्टेयरिंग, पुलिस का पेपर भी पास किया
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 रोडवेज बस चलाते हुए सुष्मिता।

तपस्वी शर्मा. झज्जर

अक्सर आपने देखा होगा कि रोडवेज बस चलाने का प्रशिक्षण लड़के ही ले रहे होते हैं। लेकिन अब बदलाव की बयार देखने को मिल रही है। लड़कियां भी इस क्षेत्र में आगे आने लगी हैं। हालांकि प्रांरभिक तौर पर ऐसी लड़कियों की संख्या कम है, लेकिन शुरूआत हो चुकी है। जिले के गांव खातीवास की बेटी सुष्मिता ने पहल करते हुए रोडवेज बस का स्टेयरिंग संभाला है।

खास बात यह भी है कि सुष्मिता एमएससी फिजिक्स प्रथम वर्ष की छात्रा है और फिर भी बस चलाने का प्रशिक्षण ले रही है सुष्मिता ने बताया कि कुछ अलग करने की ललक होनी चाहिए, फिर लक्ष्य हासिल कर लेना आसान हो जाता है। सुष्मिता ने अपनी योग्यता के बल पर दिल्ली पुलिस में सिपाही पद के लिए टेस्ट को भी पास कर लिया है और उसके फिजीकल टेस्ट की तैयारी भी कर रही है। ऊंचे मनोबल से लबालब सुष्मिता कहती है कि पता नहीं जीवन में कब उतार चढ़ाव आ जाए, ऐसे में प्रत्येक परिस्थिति चाहे अच्छी हो या बुरी, सबके लिए तैयार होना जरूरी है। वह जाट कॉलेज रोहतक से एमएससी फिजिक्स प्रथम वर्ष की छात्रा है। फिर भी कुछ अलग करने की चाह को लेकर सभी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा को दिखाने का प्रयास निरतंर कर रही हूं। ऐसे में उनके पिता सुभाष जो कि पेशे से फोटोग्राफर हैं आ पूरा सहयोग कर रहे है। जिससे हिम्मत और हौंसला और अधिक बढ़ जाता है।

बदलाव की आई बयार

वीर भूमि झज्जर की बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं है। सुनील डबास, मानुषी छिल्लर, मनु भाकर जैसी बेटियों ने अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर जिले झज्जर, प्रदेश व पूरे भारत वर्ष का गौरव बढ़ाया है। हमारी बेटियों ने भारतीय सेनाओं में भी अपनी शौर्य और प्रतिभाओं को दिखाया है। इसी कड़ी में सुष्मिता ने भी पहल की है। एमएससी फिजीक्सि की छात्रा होने के बावजूद बस चलाने का हौंसला दिखाया है, जिसके चलते वह दूसरी बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी है।

सुष्मिता कहती है कि परिवार के साथ-साथ उनके गुरूजी कृष्ण पूरा सहयोग मिल रहा और वे हौंसला अफजाई कर रहे है। वहीं कृष्ण का कहना है कि सुष्मिता अद्धभुत प्रतिभा की धनी है, एक बार समझाने के बाद दोबारा बताने की जरूरत नहीं होती। काफी समय से बच्चों को बस चलाने का प्रशिक्षण दे रहे है, लेकिन पहली दफा एक बेटी बस चलाना सीखने आई है। बहुत सुखद महसूस होता है।


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