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कोविड के नए वेरिएंट से सतर्क रहने की जरूरत

देश के सामने कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने चिंता बढ़ा दी है। भारत ने बहुत ही शानदार तरीके से कोरोना को नियंत्रित किया है, टीकाकरण के मामले में भी वह बहुत आगे है। इसके चलते लोगों में कोरोना के प्रति बेफिक्री आई है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को खतरनाक बताया है, इससे भारत का अलर्ट होना स्वाभाविक है।

कोविड के नए वेरिएंट से सतर्क रहने की जरूरत
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संपादकीय लेख

Haribhoomi Editorial : आज से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है, जिसके हंगामेदार रहने की पूरी संभावना है। सर्वदलीय बैठक में मुद्दों को लेकर विपक्ष के तेवर देखने से झलक मिल गई है। सबसे अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने की आंदोलनरत किसानों की बहुप्रतीक्षित मांग पर विपक्ष की प्राथमिकता से सरकार पर दबाव रहेगा। केंद्र सरकार ने एमएसपी के नियम कायदे निर्धारण के लिए समिति बनाने की बात कही है, जिसमें किसानों के प्रतिनिधि भी रहेंगे। एमएसपी पर कानमन बनने से पहले किसान दिल्ली की सीमाओं से हटने वाले नहीं हैं, ऐसी मंशा आंदोलनकारी नेताओं ने पहले ही जता दिया है, लेकिन इस सत्र के साथ देश के सामने कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने चिंता बढ़ा दी है। भारत ने बहुत ही शानदार तरीके से कोरोना को नियंत्रित किया है, टीकाकरण के मामले में भी वह बहुत आगे है। इसके चलते लोगों में कोरोना के प्रति बेफिक्री आई है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन को खतरनाक बताया है, इससे भारत का अलर्ट होना स्वाभाविक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कोरोना की नई चुनौती को लेकर कंसर्न शीर्ष मंत्रियों-अधिकारियों के साथ बैठक हुई और सहमति बनी कि भारत को इस नए वैरिएंट के मामले में पहले से सबक लेते हुए किसी प्रकार की चूक नहीं करनी चाहिए।

इसके चलते सरकार हर तरह से मुस्तैद रहना चाहती है और देश में इसको लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। नया और संभावित रूप से अधिक संक्रामक स्वरूप ओमिक्रॉन के बारे में पहली बार 24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को सूचित किया गया था। तब से अन्य देशों के साथ ही बोत्सवाना, बेल्जियम, हांगकांग और इज़राइल में इसके मामले मिले हैं। एम्स प्रमुख डॉ. रणदीप गुलेरिया ने चौंकाने वाला दावा किया है कि ओमिक्रॉन वायरस वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन एरिया में 30 से भी ज्यादा म्यूटेशन हो चुके हैं, जिसके चलते यह वैक्सीन को भी चकमा दे सकता है। इसलिए इसके प्रतिरक्षा तंत्र से बच निकलने की क्षमता विकसित करने की संभावना है। चूंकि अधिकांश टीके स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ एंटीबॉडी बनाकर काम करते हैं, इसलिए स्पाइक प्रोटीन क्षेत्र में इतने सारे परिवर्तन से कोविड-19 टीकों की प्रभावशीलता कम हो सकती है। डॉ. गुलेरिया ने कहा है कि इस नए वैरिएंट में वैक्सीन कितना कारगर है, इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। स्पाइक प्रोटीन की उपस्थिति पोषक कोशिका में वायरस के प्रवेश को आसान बनाती है और इसे फैलने देने और संक्रमण पैदा करने के लिए जिम्मेदार है। संसद के शीत सत्र में भी कोविड मुद्दे पर बहस होने की संभावना है, जिसमें विपक्ष सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश करेगा। भारत पहले से ही भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक कंसोर्टिया इनसाकोग कोरोना वायरस के नए स्वरूप बी.1.1.1.529 पर बारीकी से नज़र रख रहा है और देश में इसकी उपस्थिति का अभी तक पता नहीं चला है।

चिकित्सक कहते हैं कि टीके के दोनों डोज व कोविड से बचाव के नियमों का पालन करते रहने से नए वैरिएंट ओमिक्रॉन से बचाव हो सकता है। रविवार को केंद्र सरकार ने राज्यों को ओमिक्रॉन वैरिएंट के प्रभाव के खिलाफ अभी से तैयारी शुरू कर देने का निर्देश देकर सतर्कता का परिचय दिया है। केंद्र ने ओमिक्रॉन को वैरिएंट ऑफ कंसर्न माना है। ओमिक्रॉन प्रभावित देशों को 'एट रिस्क कंट्रीज' की लिस्ट में रखा गया है, इसलिए वहां आने व जाने वालों पर कड़ी निगरानी जरूरी है। राज्यों के अपने स्तर पर नए वैरिएंट का डाटा जुटाना चाहिए, टेस्टिंग बढ़ाना व केस मिलने पर हॉटस्पॉट चिन्हित करना चाहिए। भारत सरकार ने देश में कोरोना के विभिन्न वैरिएंट्स में हो रहे म्यूटेशंस को मॉनिटर करने के लिए इनसाकोग (इंडियन सार्स- कोव-2 जीनोमिक्स) कंसोर्टियम का गठन किया है, जो एक मल्टी-लैबोरेटरी है और इसका कोरोना वायरस जीनोमिक वैरिएशंस को मॉनिटर करने के लिए पैन-इंडिया नेटवर्क मौजूद है।

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