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उपचुनावों के नतीजों में सभी दलों के लिए संदेश

ये नतीजे इतने मिश्रित हैं कि किसी एक दल के पास खुश होने का कोई मौका नहीं है। खास कर भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए मिलाजुला संदेश है। चूंकि कुछ ही महीनों में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश और पंजाब बड़े राज्य हैं, इसलिए इन उपचुनावों को जनता का मूड भांपने के रूप में लिया जा रहा है। उपचुनावों में भाजपा 22 पर मुकाबले में उतरी थी, लेकिन 8 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी।

उपचुनावों के नतीजों में सभी दलों के लिए संदेश
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Haribhoomi Editorial : यू तो उपचुनावों के नतीजों का सत्ताधारी दलों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है, लेकिन इससे जनता के मूड का जरूर पता चल जाता है। अभी देश में किसान आंदोलन चल रहा है, खाने-पीने की महंगाई उच्च स्तर पर है, पेट्रोल व डीजल के दाम प्रति लीटर रिकार्ड बना रहे हैं, बेरोजगारी दर दिनोंदिन बढ़ रही हैँ, अर्थवयवस्था की गति सुस्त है, विकास योजनाएं लेटलतीफ हैं। सीमा पर चीन के साथ तनाव है।

इन परिस्थितियों में हुए उपचुनावों के नतीजे सत्ताधारी दल के लिए लिटमस टेस्ट की तरह है। देश के 3 लोकसभा सीटों और 13 राज्यों की 29 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आए हैं, जिनमें सभी दलों के लिए संदेश है। ये नतीजे इतने मिश्रित हैं कि किसी एक दल के पास खुश होने का कोई मौका नहीं है। खास कर भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए मिलाजुला संदेश है। चूंकि कुछ ही महीनों में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश और पंजाब बड़े राज्य हैं, इसलिए इन उपचुनावों को जनता का मूड भांपने के रूप में लिया जा रहा है। उपचुनावों में भाजपा 22 पर मुकाबले में उतरी थी, लेकिन 8 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी। लोकसभा सीट के तीन सीट पर उपचुनाव हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के मंडी में कांग्रेस ने जीत हासिल की है, यह पहले भाजपा के पास थी।

मध्यप्रदेश के खांडवा में भाजपा अपनी सीट बचाने में कामयाब रही है। दादर नगर हवेली में निर्दलीय सांसद की मौत के बाद उपचुनाव हुए, जिसमें उनकी पत्नी ने शिवसेना के टिकट से चुनाव लड़ा और सहानुभूति लहर में पति की सीट बचाने में सफल रहीं। यह सीट शिवसेना के खाते में गई है। लोकसभा के तीन सीटों के परिणाम देखें तो भाजपा ने एक सीट खोई है। हिमाचल में तीन सीटों पर विधानसभा उपचुनाव हुए कांग्रेस ने बाजी मारी है, यह राज्य में सत्ताधारी भाजपा के लिए झटका है। असम में भाजपा व सहयोगियों ने सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज कर शानदार प्रदर्शन किया है। राजस्थान में कांग्रेस ने दोनों सीटें जीती हैं। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया है और उपचुनाव में सभी चार सीटों पर जीती है। इससे पहले ममता बनर्जी ने भी जीत हासिल की थी। बंगाल में भाजपा का कठिन समय जारी है।

हरियाणा में इनेलो लाज बचाने में कामयाब रहा है। इनेलो के अभय सिंह चौटाला को भाजपा से तगड़ी फाइट मिली है। किसान आंदोलन के मुद्दे पर अभय सिंह चौटाला ने इस्तीफा दिया था। मध्यप्रदेश में विस के तीन में दो पर भाजपा व एक रैगांव सीट पर कांग्रेस को जीत हासिल हुई है। आंध्र प्रदेश की बडवेल सीट पर सत्ताधसीन वाईएसआर कांग्रेस, जबकि महाराष्ट्र की देगुलर सीट पर कांग्रेस ने अपना कब्जा बरकरार रखा है। तेलंगाना की हुजूराबाद सीट पर टीआरएस छोड़कर भाजपा में आए एटाला राजेंद्र को जीत मिली है। बिहार में लालू यादव का करिश्मा नहीं चला, सत्ताधारी जदयू को दोनों सीट पर विजय मिली है। बंगाल व बिहार में कांग्रेस कुछ नहीं कर पाई। कर्नाटक में एक पर भाजपा तो एक पर कांग्रेस ने जीत हासिल की।

मेघालय में सत्ताधारी एनपीपी और उसकी सहयोगी यूडीपी ने सभी तीनों सीटों पर तो मिजोरम की एक सीट पर भी सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट ने जीत दर्ज की है। विधानसभा उपचुनाव के नतीजे बता रहे हैं कि अधिकांश राज्यों में सत्ताधारी दलों को ही सफलता मिली है। इसे किसान आंदोलन को लेकर सरकार के खिलाफ जनादेश नहीं माना जा सकता है। विस उपचुनाव के परिणाम भावी विधानसभा चुनाव को लेकर कोई संकेत देते नहीं दिखाई पड़ रहे हैं। उपचुनाव के नतीजे में भाजपा व कांग्रेस समेत क्षेत्रीय दलों के लिए चिंतन के संदेश हैं।

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