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रेवाड़ी : ऑनलाइन निगरानी के लिए लगाए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर मीटर बन गए कबाड़

आरटीआई से मांगे गए जवाब में खुलाया हुआ कि निगम के पास आंकड़ा मौजूद नहीं है जबकि सरकार ने इसे अति महत्वकांक्षी योजना बताकर वर्ष 2015 में शुरू किया था ।

रेवाड़ी : ऑनलाइन निगरानी के लिए लगाए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर मीटर बन गए कबाड़
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हरिभूिम न्यूज : रेवाड़ी

दक्षिणी हरियाणा बिजली निगम (Electricity corporation) की बदहाल व्यवस्था में कुछ अधिकारियों की लापरवाही से 3 साल पहले शहर में करीब 1000 ट्रांसफार्मर की ऑनलाइन निगरानी के लिए लगाए गए डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर (डीटी) मीटर कबाड़ बन गए हैं।

निगम की ओर से यदि इन मीटर का रख-रखाव किया जाता तो सरकार के 5 करोड रुपए से अधिक बचने के साथ ही शहरी उपभोक्ताओं को बिजली कटों से निजात मिल सकती थी। अधिकारी की संवेदनशीलता आरटीआई से मांगे गए जवाब से समझी जा सकती है जवाब में कहा गया है कि निगम के पास आंकड़ा मौजूद नहीं है जबकि सरकार ने इसे अति महत्वकांक्षी योजना बताकर शुरू किया था वर्ष 2015 में बिजली निगम की ओर से ट्रांसफार्मर की पावर सप्लाई को मापने के लिए डीटी मीटर के साथ एक सिटी व ऑनलाइन करने पर कुल करीब 1.25 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

इन मीटरों से ट्रांसफार्मर में चल रहे कनेक्शनों का ओवरलोड अधिकारी ऑफिस में बैठे पता कर सकते थे इसका सबसे बड़ा फायदा यह होना था कि ओवर लोडिंग से ट्रांसफार्मर जलने के केस कुछ हद तक कम हो जाते लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और बीते 3 साल में महज ओवरलोडिंग से 150 से अधिक 3 .75 करोड़ के ट्रांसफार्मर जल गए एक ट्रांसफार्मर की औसतन की कीमत 2.5 लाख ली गई है। हालांकि इस दौरान 300 से अधिक ट्रांसफार्मर जलने के केस आये लेकिन इनमें से आधे भी ठीक नहीं हो पाए।

रीडिंग तक की जानकारी उपलब्ध नहीं थी

शहर के छिपटवाड़ा निवासी साकेत धीगड़ा ने अगस्त में रेवाड़ी कार्यकारी अभियंता डीटी मीटर सहित कुल 10 बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। बिंदु नंबर 9 पर ट्रांसफार्मर संख्या 11 1410 4797, 1 1 1 40 410507, 111 408 588, 1 1 1 408 587,व 8480 465 द्वारा कितनी रीडिंग निकाली गई इसकी जानकारी मांगी गई थी। नंबर- 10 पर शहर के ट्रांसफार्मर ट्रांसफार्मर पर लगे कितने डीटी मीटर ठीक से काम कर रहे हैं व कितने काम नहीं कर रहे इसकी जानकारी मांगी गई थी लेकिन पूरा शहर तो दूर निगम के पास ट्रांसफार्मर द्वारा निकाली गई रीडिंग तक की जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

चोरी का पता करना भी था मकसद

डीटी मीटरों का सही तरह से प्रयोग होता तो इसका फायदा निगम व उपभोक्ता दोनों को होना था किस एरिया में ट्रांसफार्मर पर लगे कनेक्शनों की खपत कितनी है अगर किसी ट्रांसफार्मर से अवैध कनेक्शन चलाए जा रहे हैं तो इसकी जानकारी डीटी मीटरों से मिल सकती थी उपभोक्ता को कितने लोड का कनेक्शन दिया गया और कितनी बिजली चोरी हो रही है इसकी जानकारी भी मिल सकती थी।

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