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किराया बढ़ाया लेकिन कितना? बसों में नहीं लगाई सूची, मनमाना किराया वसूल रहे संचालक

परिवहन विभाग ने किराया बढ़ाने दी अनुमति, पर निगरानी करना भूल गए जिम्मेदार, बसों में सूची नहीं लगाए जाने से कंडक्टरों की मांग के हिसाब से ही देना पड़ रहा है, एक ही जगह का अलग-अलग किराया वसूल रहे अलग-अलग बस संचालक, पढ़िए पूरी ख़बर...

किराया बढ़ाया लेकिन कितना? बसों में नहीं लगाई सूची, मनमाना किराया वसूल रहे संचालक
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बालोद: किराया बढ़ने के महीनों बाद भी बसों में किराए की सूची चस्पा नहीं की गई है। बस संचालक अपने-अपने ढंग से किराया वसूल कर रहे हैं। उन्हें देखने-रोकने वाला विभाग मौन साधे यात्रियों को लुटते देख रहा है। गुरूर से धमतरी का किराया अलग-अलग बसों में अलग-अलग है। कुछ बस संचालक गुरूर से धमतरी का किराया 25 रूपये ले रहे हैं, तो कुछ तीस रूपये ले रहे हैं। वहीं, गुरूर से बालोद का किराया कुछ बस संचालक 35 रूपए ले रहे हैं, तो कुछ 40 रूपये तक किराया ले रहे हैं। इसी तरह गुरूर से राजनांदगांव का किराया भी अलग-अलग बसों में अलग-अलग है। अन्य बसों में कम किराया लेने की बात कहने पर बस कंडक्टरों द्वारा यात्रियों से दुर्व्यवहार किए जाने की शिकायतें आम हैं। यात्रियों द्वारा ज्यादा कुछ कहने पर बीच रास्ते में ही उतर जाने की धमकी दी जाती है।

उल्लेखनीय है कि बस संचालकों की मांग पर शासन ने बस किराया में वृद्धि की अनुमति दी। उसके बाद किराया तो बढ़ा दिया गया, लेकिन प्रशासन उस वृद्धि पर निगरानी करना या अंकुश लगाने की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। इससे बस संचालकों को खुली छूट मिल गई। बस संचालकों द्वारा किस रूट में कितना किराया बढ़ाया गया है, यह महीनों बाद भी स्पष्ट नहीं है। महीनों बाद भी परिवहन विभाग बसों में किराया सूची लगवाने में नाकाम रहा है। यह परिवहन विभाग की लापरवाही है या उनकी मिलीभगत यह कहा नहीं जा सकता, लेकिन परिवहन विभाग बस संचालकों के आगे बौना साबित हो रहा है। लगातार शिकायत के बाद भी किराया सूची नहीं लगवाई जा रही है।

चिल्हर को लेकर अक्सर बहस

बसों में छोटी दूरी के यात्री ज्यादा लूट के शिकार होते हैं। 3 किलोमीटर की दूरी के लिए 10 से 15 रूपये किराया ले लिया जाता है। वहीं, यात्रियों को चिल्हर के नाम पर प्रताड़ित करने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। बस संचालकों द्वारा यात्रियों से चिल्हर लाने कहा जाता है। चिल्हर नहीं है कहकर बकाया राशि नहीं लौटाई जाती, कई बार यात्रियों को अपने गतव्य तक पहुंचने के बाद भी बकाया राशि के लिए कंडक्टर के चक्कर लगाते देखा गया है।

अधिकतर बसों में नहीं मिलता टिकट

बस संचालकों द्वारा यात्रियों को टिकट नहीं दी जाती। कई बार तो मांगने पर भी टिकट नहीं दी जाती। जोर देने पर टिकट देते हैं, तो उसमे क्या लिखा होता है यह स्पष्ट नहीं रहता, जिससे वास्तविक किराया की जानकारी नहीं हो पाती, या फिर कंडक्टर गंतव्य स्थान के नाम ही टिकट पर लिखकर दे देता है, किराए का उल्लेख नहीं किया जाता।

बैठक लेकर सुधारी जाएगी स्थिति

धमतरी एवं राजनांदगांव जिला के परिवहन विभाग द्वारा किराया सूची जारी नहीं की गई है। बस संचालकों की बैठक लेकर स्थिति को सुधारा जाएगा।

- प्रकाश कुमार, परिवहन अधिकारी

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