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ट्रेनें रद्द होने से बढ़ी दिक्कतें, हर दिन सैकड़ों रिफंड, भीड़ संभालने लगी फोर्स

रुपौंद व झलवारा सेक्शन जोड़ने 21 ट्रेनें रद्द, रिफंड लेने बढ़ी यात्रियों की संख्या, ट्रेनें रद्द होने के बाद से प्रतिदिन 200 से अधिक यात्री रिफंड लेने के लिए पहुंच रहे हैं। आरक्षण केंद्र के कर्मचारियों को आरपीएफ की जरूरत पड़ रही है। पढ़िए पूरी ख़बर..

ट्रेनें रद्द होने से बढ़ी दिक्कतें, हर दिन सैकड़ों रिफंड, भीड़ संभालने लगी फोर्स
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रायपुर: रुपौंद व झलवारा सेक्शन को तीसरी लाइन से जोड़ने के लिए रेलवे ने एक साथ अप व डाउन दिशा की 21 ट्रेनें रद्द कर दी हैं। इस वजह से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। शुक्रवार को आरक्षण केंद्र में सुबह से शाम तक रिफंड लेने यात्रियों की भीड़ जुटी रही। दोपहर में टिकट खरीदने से अधिक रिफंड लेने वालों की संख्या रही। किराया डूब जाने के डर से यात्री लंबी लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। रिफंड लेने व आरक्षण लेने वाले यात्री अधिक होने से अब व्यवस्था संभालने के लिए आरक्षण केंद्र के कर्मचारियों को आरपीएफ की जरूरत पड़ रही है।

आरपीएफ जवान संभाल रहे भीड़

आरपीएफ जवान यात्रियों को न केवल समझा रहे, बल्कि कतार में व्यवस्थित भी कर रहे हैं। 21 ट्रेने रद्द करने का अचानक निर्णय लिया गया। इससे जिन यात्रियों के मोबाइल पर मैसेज पहुंचा, उन्हें झटका भी लगा। जाहिर है कि यात्रा को लेकर वे पूरी तैयारी कर चुके थे। किसी के घर विवाह कार्यक्रम तो किसी को ऑफिस के काम से जाना होगा, पर ट्रेनें नहीं चल रही हैं। ऐसी स्थिति में या तो उन्हें बाद में यात्रा करनी पड़ेगी या फिर वैकल्पिक व्यवस्था कर गंतव्य तक पहुंचना पड़ेगा।

हर दिन 200 से अधिक रिफंड

आरक्षण केंद्र से मिली जानकारी अनुसार ट्रेनें रद्द होने के बाद से प्रतिदिन 200 से अधिक यात्री रिफंड लेने के लिए पहुंच रहे हैं। पहले यह आंकड़ा 400 तक था, लेेकिन अब यह कम होने लगा है। 10 में 3 यात्री रिफंड कराने पहुंच रहे हैं। दिसंबर में अभी-तक तूफान और तीसरी लाइन के काम से 60 से अधिक ट्रेनें रद्द हो चुकी हैं, जिनमें कुछ ट्रेनें पटरी में लौट चुकी हैं। ट्रेन रद्द होने से रेलवे को लाखों का नुकसान हुआ है। अधिकारियों का कहना है, वर्तमान में संख्या अत्यधिक होने के कारण अचानक अव्यवस्था होने लगती है। काउंटर में विवाद जैसी स्थिति भी निर्मित होने से आरपीएफ से मदद मांगी जाती है। आरपीएफ के जवानों के पहुंचने के बाद स्थिति सामान्य कराने के बाद और बारी-बारी रिफंड मिलने का सिलसिला शुरू होता है।

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