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राजधानी में नए बायपास में अंधा टर्न, नहीं बजाया हॉर्न तो खतरा कभी भी

रिंग रोड 01 में ट्रैफिक की स्मूथ व्यवस्था के लिए कई जगहों पर ओवर ब्रिज बनाए हैं लेकिन इन ओवरब्रिज के नीचे शुरू किए गए बायपास इन दिनों जोखिम बढ़ाने लगे हैं। खासकर अंडर बायपास में अंधे टर्न ने की वजह से गाड़ियों के बीच टकराव के हालात बन रहे हैं। पढ़िए पूरी ख़बर...

राजधानी में नए बायपास में अंधा टर्न, नहीं बजाया हॉर्न तो खतरा कभी भी
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रायपुर: रिंग रोड 01 में टाटीबंध से लेकर तेलीबांधा मार्ग पर बनाए गए फ्लाईओवर के नीचे से अंडर बायपास लोक निर्माण विभाग ने बनवाए हैं। पचपेढ़ी नाका और टैगोर नगर की तरफ पुराने समय में बनाए गए अंडर बायपास मौजूद हैं लेकिन इसके बाद भी नए अंडर बायपास की ओर ट्रेफिक का दबाव ज्यादा है। इस कारण से रोड सेफ्टी इंतजाम नहीं हो पाने के कारण यहां पर हादसे का डर बढ़ने लगा है।

अगर किसी गाड़ी से हार्न की आवाज न निकले तो हादसे की हादसे का अंदेशा है। रिंग रोड पर ट्रैफिक पुलिस ने स्पीड रंबल और फिर ट्रैफिक रोड सेफ्टी मिरर की भी जरूरत बताई है लेकिन सड़क चौड़ीकरण और फिर सुपर फास्ट वे तैयार होने के बाद यहां पर हादसों को रोकने के लिए कोई प्रयोग नहीं किए जा सके हैं। कुशालपुर, भाटागांव और रायपुरा में अंडर बायपास बनने के अलावा न्यू राजेंद्र नगर की ओर नया बायपास बना हुआ है। चारों जगहों में वाहनों के बीच टकराव देखे जा सकते हैं। कुशालपुर ओवर ब्रिज में दोनों तरफ से अंधा टर्न होने के कारण 100 मीटर में भी गाड़ियों की दिशा समझ पाना बहुत मुश्किल है। वाहनों की संख्या के हिसाब से सर्विस लेन का भी हिस्सा पहले से कम पड़ने लगा है। आसपास के सड़क के हिस्से में अतिक्रमण और फिर बेतरतीब पार्किंग की वजह से भी बड़ी परेशानी है। सड़क सुरक्षा समिति की पिछली बैठक में भी रिंग रोड में सुधार व मरम्मत कार्य का मसला गरमा चुका है। एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग के लिए आवश्यक निर्देश भी जारी हो चुके हैं।

स्पीड रंबल- रोड मिरर जरूरी

सड़क में हादसों को रोकने के लिए स्पीड रंबल या फिर रोड सेफ्टी मिरर की जरूरत है। डीएसपी ट्रेफिक सतीश सिंह ठाकुर भी बता चुके हैं, स्पीड रंबल होने की वजह से वाहनों की रफ्तार पर काबू किया जा सकता है। जबकि रोड सेफ्टी मिरर उपयोगी हिस्सों में लगने से राहगीर आने वाले वाहन चालकों को दूर से देख सकते हैं। ब्लाइंड टर्न पर इस तरह के प्रयोग और शहरों में कारगर साबित हुए हैं। इसके लिए संबंधित विभाग को लेटर जारी किया जाएगा।

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